मोदी पर मदनी की 'सच्चाई' से कांग्रेस में बेचैनी
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव महमूद मदनी ने कांग्रेस को ऐसी जगह जख्म दिया है, जहां उसे सबसे ज्यादा दुखता है।
दरअसल, कांग्रेस दावा करती आई है कि वह भारतीय समाज और राजनीति के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने की सबसे पुरानी और विश्वासपात्र 'ठेकेदार' है, लेकिन मदनी के एक बयान ने सारा खेल बिगाड़ दिया है।
जाहिर है, इस बयान से कांग्रेस का मूड बिगड़ना तय है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मीम अफजल का कहना है कि मदनी ने देश के मुसलमानों का अपमान किया है।
कांग्रेस बौखलाई उन्होंने कहा, "देश का मुसलमान न तो मोदी से डरा है और न डरेगा।" उन्होंने मदनी से सवाल भी किया कि उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री में अचानक क्या खूबी दिख गई।
इस पलटवार के बावजूद मदनी के बयान को हल्के में नहीं लिया जा सकता। और इसकी वजह कई हैं। उन्होंने कांग्रेस को झटका दिया है कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के वक्त कौम को सिर्फ वोट बैंक की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
इस बयान से कांग्रेस की उन उम्मीदों की हवा निकली होगी, जिनके आधार पर वह नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी की लड़ाई को सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता की जंग के तौर पर दिखाना चाहती है।
1919 में स्थापित जमीयत देश का सबसे बड़ा मुस्लिम संगठन है, जिसके करीब 125 लाख सक्रिय सदस्य हैं। ये सभी सदस्य हर महीने एक रुपया देते हैं। और संगठन सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियों के मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभाता आया है।
मोदी पर फतेहपुरी मस्जिद ने क्या कहा? फतेहपुरी मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम अहमद का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि मोदी अगर प्रधानमंत्री बनते हैं, तो धर्मनिरपेक्ष्ा बनने की कोशिश करेंगे।
अहमद ने कहा कि जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं ने देश के अहम पदों पर पहुंचकर धर्मनिरपेक्षता का पालन किया, उसी तरह मोदी भी सांप्रदायिकता के एजेंडे से हटकर इसी सिद्धांत के पालन के लिए मजबूर होंगे।
मदनी के बयान से भाजपा उछल रही है। उसने कहा कि वह जो कहती आई है, मदनी ने उसी सच्चाई को सभी के सामने रख दिया है।
भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस का झूठ सभी के सामने आ गया है और यह भी साफ है कि वह मुसलमानों को बेवकूफ बनाती आई है।