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RSS का सर्वेक्षण: MP में भाजपा को खतरा
हरीश लखेड़ा
Updated Mon, 18 Nov 2013 08:37 PM IST
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चुनावी महासमर में जुबानी जंग तेज करने के साथ ही मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस सर्वे और सीटों की गणित में उलझ गई है।
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अपने-अपने हिसाब से दोनों ही बहुमत के आंकड़े अपने पक्ष में बता रहे हैं। सबके अपने अपने दावे हैं।
पिछले चुनाव में भाजपा को 143 सीटें मिली थी और कांग्रेस को 71, ज्यादातर सर्वे भाजपा की बढ़त दिखा रहे हैं लेकिन कांग्रेस इस बार परिवर्तन की आस लगाए हुए है।
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सर्वे और सीटों का गणित
मध्य प्रदेश के चुनावी महासमर को लेकर आए विभिन्न सर्वेक्षणों में वैसे तो अब तक भाजपा को आगे दिखाया जाता रहा है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कराए सर्वेक्षण की मानें तो भाजपा संकट में है।
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जबिक भाजपा ने खुद के सर्वे में अपने को 230 में से 130 सीटें तक दिला दी है, जबकि प्रदेश के आला अफसरों का सर्वे 110 से 115 सीटें दे रहा है। मीडिया के लगभग सभी सर्वे भाजपा को सबसे आगे दिखाते रहे है।
पढ़ें, बीजेपी में बगावत तो कांग्रेस में भितरघात
इंदौर का सट्टा बाजार भी भाजपा को बढ़त दिखा रहा है। लेकिन संघ के सर्वे पर भाजपा खामोश है।
पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल कहते हैं कि संघ तो कोई सर्वे कराता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस चुनाव की तैयारी पिछला चुनाव जीतने के अगले दिन से ही शुरू कर दी थी।
भाजपा परीक्षा के दिनों में हीं नहीं बल्कि हर साल तैयारी करती है, इसलिए इस बार पहले से ज्यादा संख्या बल से विधानसभा पहुंचेंगे।
कांग्रेस को मिलेंगी 130 सीटें
उधर दिल्ली से पर्यवेक्षक के तौर पर भोपाल में अड्डा जमाए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री व कांग्रेस नेता हरीश रावत कहते हैं कि पार्टी यहां अब पूरी तरह से टक्कर में आ गई है।
रावत का आकलन है कि कांग्रेस और भाजपा के पास 80-80 सीटें पक्की हैं, बाकी सीटों को जो अपने पाले में लाएगा वही सरकार बनाएगा। रावत का दावा है कि कांग्रेस इस बार कम से कम 130 का आंकड़ा पार करेगी।
पिछली दफा 37.64 फीसदी वोट पाकर भाजपा 230 सीटों वाली विधानसभा में 143 सीटें पाने में कामयाब रही, जबकि कांग्रेस 32.36 फीसदी वोट पाकर 71 सीटों पर सिमट गई।
पिछली दफा 5.28 फीसदी वोट से पिछड़ने वाली कांग्रेस यह भी मान रही है कि सिंधिया का नाम आगे आने से पार्टी को युवा वर्ग से कम से कम ढाई फीसदी वोट का फायदा मिलेगा।
बसपा तब लगभग आठ फीसदी वोट पाकर सात सीटें जीतने में सफल रही थी। लेकिन तब उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार थी, लेकिन अब वह सत्ता में नहीं है।
इसलिए भाजपा को आशंका है कि इस बार यूपी में बसपा के सत्ता में नहीं होने से यहां भी उसे कम वोट मिलेंगे। इसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है। हालांकि भाजपा मुख्यमंत्री आवास में मोची, नाई, धोबी जैसे समाजों के सम्मेलनों होने के बाद अब उनका समर्थन पाने की उम्मीद पाल रही है।