मदरसे के छात्रों ने लिखा था- 'आईएस इज कमिंग'
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आगरा के फुलट्टी बाजार में 21 सितंबर को प्याऊ की दीवार पर कोयले से लिखा मिला ‘आईएसआईएस इज कमिंग’ खुराफात नहीं, बल्कि शरारत थी।
लगभग तीन महीने की जांच पड़ताल के बाद यही रिपोर्ट दी है खुफिया एजेंसियों ने। जांच के दौरान मदरसे के छात्रों से लेकर फुलट्टी में किराए पर रहने वाले लोगों तक से पूछताछ की गई।
लगभग 50 मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई गई। हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद भी ली गई। जब इसके पीछे खुराफात होने के साक्ष्य नहीं मिले, तो मान लिया कि यह किसी की शरारत ही रही होगी।
उन दिनों यह जानकारी आ रही थी कि इंटरनेट पर इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के वेबसाइट को सर्च करने वाले युवाओं में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के हैं।
आतंकी संगठन के फेसबुक पेज को वेस्ट यूपी के कई लोगों ने लाइक किया था। इसके चलते इस संदेश को बेहद गंभीरता से लिया गया। यहां तक कि केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने भी यूपी पुलिस से संपर्क साधा।
खुफिया एजेंसियों ने पुलिस को सौंपी रिपोर्ट
पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच में एलआईयू, एटीएस और स्थानीय पुलिस को लगाया गया था। साइबर सेल ने आईएस के फेसबुक पेज से जुड़े लोगों के बारे में पड़ताल की। उनकी आईडी निकलवाई गई। पुलिस ने प्याऊ के आस पास के लोगों से पूछताछ की।
21 की रात मोबाइल पर बात करने वाले लोगों के फोन नंबर की डिटेल निकलवार देखा गया कि इनमें कोई संदिग्ध नंबर तो नहीं है। जब कहीं कुछ गड़बड़ नहीं मिला, तो लोगों के बयान के आधार पर मान लिया गया कि यह शरारत ही थी।
खुफिया सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बच्चों की शरारत हो सकती है। अगर इसके पीछे खुराफात होती तो इसे दोहराया जाता। पुलिस के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है।
पता नहीं चला, कौन था वो
खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस की तीन महीनें की जांच के बाद भले ही इसे शरारत मान लिया हो, लेकिन तमाम कोशिश के बावजूद यह पता नहीं चल पाया कि इसे किसने लिखा था? शहर में न तो इससे पहले कभी इस तरह कोई संदेश नहीं लिखा मिला और न ही इसके बाद।