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मदनी बोले, मदरसे नहीं हैं आतंक की पाठशाला

Sun, 16 Nov 2014 02:19 PM IST
Updated Sun, 16 Nov 2014 02:19 PM IST
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Madarasa's are not Seminaries of terrorism

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मदरसों को आतंकवाद के अड्डे बताने वालों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार मानती है कि मुसलमान और मदरसे आतंकवाद में संलिप्त नहीं तो वह अपने नेताओं की जुबान पर लगाम क्यों नहीं कसती।

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मदनी ने अपने विरोधियों को सीधा निशाना बनाते हुए कहा कि हमारे पूर्वज देश के ही हैं, मुसलमान कहीं बाहर से नहीं आए, हम यहीं के हैं। मदनी ने जमीयत के अधिवेशन आपसी भाईचारे का संदेश देते हुए लोगों से हिंदू और मुस्लिमों के बीच नफरत की दीवार तोड़ने की अपील की।
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कामिसपुरा रोड पर आयोजित संगठन के दो दिवसीय अधिवेशन में पहले दिन मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद जो परिणाम सामने आए वह चौंकाने वाले थे।

उम्मीद थी कि केंद्र में मिली जुली सरकार बनेगी, लेकिन भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई। सभी सियासी और गैर सियासी पार्टियों के पैरों तले से जमीन खिसक गई और उन्होंने चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न राजनीतिक दल नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। इन हालात में जमीयत-ए-उलेमा कौम को संदेश दे रही है कि इन नफरतों की दीवारों को तोड़ डालो।

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'मदरसों को आतंकवाद से जोड़ रहे हैं भाजपा नेता'

Madarasa's are not Seminaries of terrorism

मौलाना मदनी ने कहा कि विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया समेत भाजपा के नेता प्यार मोहब्बत और शांति का संदेश देने वाले मदरसों को आतंकवाद से जोड़ रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि मुसलमान और मदरसे आतंकवाद के पनाहगार नहीं है।

मदनी ने सवाल दागे कि यदि केंद्र सरकार को लगता है कि मुसलमान और मदरसे आतंकवाद में संलिप्त नहीं है तो वे अपने नेताओं की जुबान पर लगाम क्यों नहीं कसती। वर्षों से दहशतगर्दी के इल्जाम में जेलों में बंद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को रिहा क्यों नहीं किया जा रहा है?

मदनी ने कहा कि सिर्फ बयान देने से कुछ नहीं होगा बयानों पर अमल करने की जरूरत है। मुल्क में हुए सांप्रदायिक दंगों में बड़ी संख्या में मुसलमानों को मौत के घाट उतारा गया, लेकिन कत्लेआम करने वाले कातिलों को आज तक फांसी की सजा नहीं हुई। बल्कि ऐसों को सरकारी समर्थन मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें मुसलमानों को मजहब के साथ जिंदा नहीं रहने देती, मुसलमानों का कसूर सिर्फ इतना है कि वह कलमे के शरीक हैं। उन्होंने कहा कि हम मजहब के बगैर जिंदा नहीं रह सकते।

‘सांप्रदायिकता धर्म निरपेक्षता के लिए खतरा’

Madarasa's are not Seminaries of terrorism

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अधिवेशन में देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने का आह्वान किया गया। सांप्रदायिकता को धर्मनिरपेक्ष मिजाज के लिए खतरा बताया गया।

जमीयत राष्ट्रीय के अधिवेशन में देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताई गई। सभी नागरिकों, मदरसों और संस्थाओं से आह्वान किया गया कि वे हिंदू एवं मुसलमानों के बीच खड़ी की गई नफरत की दीवार को तोड़ने के लिए आगे आएं।

जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मदरसों को संचालित करने वाले और उससे जुड़े लोग देश के वर्तमान हालात को समझें और अपने सीमित दायरे से बाहर निकल कर  बहुसंख्यक समाज के साथ सौहार्दपूर्ण संवाद स्थापित करें।

मदनी कहा कि मौजूदा समय में सांप्रदायिक ताकतें हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत की दीवार को बढ़ाने में लगी हैं, लेकिन हम सभी को  इस दीवार को हर हाल में तोड़ना है। इसके लिए सभी को समाज में भाईचारा बढ़ाने के लिए कोशिश करनी होगी।

मौलाना मदनी ने कहा कि देश में सांप्रदायिकता बढ़ती है तो उसका सबसे ज्यादा नुकसान अल्पसंख्यकों को होगा और इससे देश का धर्मनिरपेक्ष मिजाज भी कमजोर होगा। मुसलमान यह न सोचे के उसके लिए रास्ते बंद हो चुके हैं। उन्हे अपने लिए रास्ता बनाने के लिए स्वयं आगे आना होगा और इसका रास्ता केवल आपसी सौहार्द एवं भाईचारा है।

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