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एलपीजी वितरकों की हड़ताल एक अक्तूबर को
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 25 Sep 2012 02:02 AM IST
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आम आदमी का हाजमा खराब कर चुकी घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की सीमित संख्या अब वितरकों के लिए भी बड़ी समस्या बन गई है। देश के करीब 800 एलपीजी वितरकों ने सरकार की मौजूदा नीति पर सवाल खड़े करते हुए एक अक्तूबर को एक दिन की हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपनी मांग पेट्रोलियम मंत्रालय के समक्ष पेश करते हुए प्रत्येक एलपीजी सिलेंडर पर 25.83 रुपये की जगह 65 रुपये प्रति सिलेंडर कमीशन की मांग रखी है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर ऑफ इंडिया के महासचिव पवन सोनी का कहना है कि सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों की संख्या सीमित करने से देश में कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। वितरकों की समस्याओं को ध्यान में रखे बगैर लिए गए निर्णय से अब कई श्रेणियों में अलग-अलग कीमत पर रसोई गैस बेचनी पड़ेगी, जोकि मुनाफाखोरी समेत कई समस्याओं को बढ़ाएगी। उनके लिए तकनीकी अभाव में सरकारी नीतियों का पालन करना मुश्किल है, जबकि उपभोक्ताओं को भी तमाम समस्याओं से दो चार होना पड़ेगा। इसलिए सरकार को सभी श्रेणी में एक समान दर (65 रुपये प्रति सिलेंडर) पर कमीशन और उपभोक्ताओं को नकद सब्सिडी देने पर विचार करना चाहिए।
सोनी ने कहा कि अगर सरकार वितरकों की सांकेतिक हड़ताल को गंभीरता से नहीं लेती है तो इसे बड़े पैमाने पर करने का निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि फेडरेशन ने करीब एक हफ्ते पहले कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी और पेट्रोलियम राज्य मंत्री आरपीएन सिंह को अपनी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए पत्र लिखा था। यह उम्मीद थी की राहुल गांधी वितरकों की समस्याओं के समाधान के लिए दखल करेंगे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी है।
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नेशनल फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर ऑफ इंडिया के महासचिव पवन सोनी का कहना है कि सब्सिडीयुक्त सिलेंडरों की संख्या सीमित करने से देश में कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। वितरकों की समस्याओं को ध्यान में रखे बगैर लिए गए निर्णय से अब कई श्रेणियों में अलग-अलग कीमत पर रसोई गैस बेचनी पड़ेगी, जोकि मुनाफाखोरी समेत कई समस्याओं को बढ़ाएगी। उनके लिए तकनीकी अभाव में सरकारी नीतियों का पालन करना मुश्किल है, जबकि उपभोक्ताओं को भी तमाम समस्याओं से दो चार होना पड़ेगा। इसलिए सरकार को सभी श्रेणी में एक समान दर (65 रुपये प्रति सिलेंडर) पर कमीशन और उपभोक्ताओं को नकद सब्सिडी देने पर विचार करना चाहिए।
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सोनी ने कहा कि अगर सरकार वितरकों की सांकेतिक हड़ताल को गंभीरता से नहीं लेती है तो इसे बड़े पैमाने पर करने का निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि फेडरेशन ने करीब एक हफ्ते पहले कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी, पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी और पेट्रोलियम राज्य मंत्री आरपीएन सिंह को अपनी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए पत्र लिखा था। यह उम्मीद थी की राहुल गांधी वितरकों की समस्याओं के समाधान के लिए दखल करेंगे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी है।
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