कांठ में झगड़े की जड़ अभी भी है बरकरार
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कांठ बवाल की जड़ लाउडस्पीकर का विवाद तो फिर भूल गए अफसर। धर्मस्थल से लाउडस्पीकर जबरिया उतारने से बात बिगड़ी थी। लाउडस्पीकर दोबारा लगाने की मांग पर ही महापंचायत का ऐलान हुआ था और पुलिस से बाद में खूनी संघर्ष हुआ जिसमें जिलाधिकारी की आंख की रोशनी तक चली गई।
बाजार खुलने और कांठ में चहल-पहल बढ़ने को सामान्य मानने वाले अफसर शायद यह भूल गए कि लाउडस्पीकर का झगड़ा तो अभी खत्म ही नहीं हुआ। चौपालों और गांवों में तो अभी इसी वजह पर चर्चा चल रही है।
पीस पार्टी के विधायक अनीसुर्रहमान के गांव अकबरपुर चैदरी पिछले पंद्रह दिनों से सुर्खियों में है। यहां के धर्मस्थल से पुलिस ने जबरिया ताला तोड़कर लाउडस्पीकर उतार लिया था। एक पक्ष का कहना था कि यह लाउडस्पीकर धर्मस्थल पर हमेशा से था और खराब होने की वजह से उतारा गया था। बाद में फिर लगाया गया तो पुलिस ने नई परंपरा बताकर लाउडस्पीकर उतार लिया। पुलिस इसे विवादित मानते हुए लाउडस्पीकर लगाने पर राजी नहीं हुई तो विवाद बढ़ता गया। 27 जून को पुलिस पर जबरदस्त पथराव हुआ था तभी से कांठ का बाजार बंद था और फोर्स थी।
झगड़े की असल वजह अपनी जगह कायम
इसी धर्मस्थल पर लाउडस्पीकर लगवाने पर अड़ी भाजपा ने महापंचायत का ऐलान कर दिया। 4 जुलाई को महापंचायत रोकने की कोशिश में फिर सारा इलाका जल उठा जिसकी आंच पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैल गई।
इस विवाद का तनाव कम हुआ बाजार खुला तो प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने लगा कि कांठ शांत हो गया। लेकिन झगड़े की असल वजह तो अपने जगह ही कायम है। लाउडस्पीकर को लेकर अबतक कोई फैसला नहीं हुआ है।
अकबरपुर चैदरी और आसपास के गांवों में अब भी यही मुद्दा है। लोगों का मानना है कि जब विवाद की जड़ ही खत्म नहीं की गई अभी तो माहौल तो कभी भी खराब हो सकता है।