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शिव महान पर्यावरणविद, विज्ञान कांग्रेस में होगी चर्चा

Wed, 06 Jan 2016 03:34 PM IST
Updated Wed, 06 Jan 2016 03:34 PM IST
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lord shiva is greatest environmentalist, will be discussed in science congress

विशुद्घ विज्ञान के बजाय गल्प और कथाओं पर चर्चा कर पिछले वर्ष विवादों में रही विज्ञान कांग्रेस इस वर्ष भी विवादों को न्योता दे सकती है। मैसूर में हो रही विज्ञान कांग्रेस में जिन मुद्दों पर चर्चा होनी है, उनमें 'भगवान शिव' और हिंदू कर्मकांडों में इस्तेमाल होने वाली 'शंख' को भी शामिल किया गया है।

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विज्ञान कांग्रेस में पर्यावरण विज्ञान के तहत एक पेपर पढ़ा जाना है, जिसका विषय है- 'भगवान शिव विश्व के सबसे महान पर्यावरणविद'। मध्य प्रदेश प्राइवेट यूनिवर्सिटी, रेगुलेटरी कमीशन, भोपाल के चेयरमैन अखिलेश के पांडेय ये पेपर पढ़ेंगे।
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मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, पेपर के एब्सट्रैक्ट में दावा किया गया है कि हिंदू धर्म बहुत पहले ही स्वच्छ वातावरण की बात समझ चुका था। ये पेपर जिस सत्र में पढ़ा जाएगा, उसमें विभिन्न शहरों में हवा की गुणवत्ता पर चर्चा होनी है।

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मोदी के बयान पर हो चुका है विवाद

lord shiva is greatest environmentalist, will be discussed in science congress

‌विज्ञान कांग्रेस में शंख की उपयोगिता पर पेपर भी पढ़ा जाएगा, जिसमें सेहत से जुड़े शंख के फायदे बताए जाएंगे। ये पेपर कानपुर के राजीव शर्मा पढ़ेंगे। पेपर को एथ्रोपोलॉजी और बिहैविरल साइंस के तहत चर्चा के लिए शामिल किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल विज्ञान कांग्रेस में दावा किया गया था कि विमान की तकनीकी प्राचीन भारत में भी उपलब्ध थी, जिस पर काफी बहस हुई थी। उस समय विज्ञान और तकनीकी मंत्री हर्षवर्धन ने दावा किया था कि पाइथागोरस प्रमेय का उद्भव भारत से हुआ था, जिस पर‌ विवाद हुआ।

प्रधानमंत्री ने 2014 में मुंबई में एक अस्पताल के उद्घाटन समारोह में कहा था कि शल्य चिकित्सा के पहले प्रयोग से हिंदू देवता गणेश का सिर जोड़ा गया था। मोदी का वो बयान भी विवादों में रहा था। उन्होंने कहा था कि जेनेटिक साइंस प्राचीन काल में मौजूद था।

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