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इस बार सबसे लंबा रोजा रखेंगे रोजेदार, आखिर क्यों?

Fri, 05 Jun 2015 02:29 AM IST
Updated Fri, 05 Jun 2015 02:29 AM IST
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longest roza came after 36 years

रमजान इस बार मोमिनों के सब्र का पूरा इम्तिहान लेगा। चिलचिलाती धूप, उमस भरी गर्मी और इस दौरान लंबी अवधि तक खाने-पीने की चीजों से दूर रहना होगा। जी हां, इस बार रोजेदारों को करीब 15 घंटे 45 मिनट तक भूख और प्यास को बर्दाश्त करना होगा।

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यह अवधि एक-दो दिन नहीं, बल्कि लगातार 19 दिनों तक बनी रहेगी। 36 साल में यह पहली बार है, जब लोगों को इतने लंबे समय तक रोजा रखना होगा। लेकिन इस्लामी विद्वानों का मानना है कि लंबे रोजे में सवाब भी ज्यादा मिलेगा।
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अगर शाबान माह की 29 तारीख को चांद नजर आया तो 18 जून से रमजान की शुरुआत हो जाएगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आवश्यक रूप से 19 जून से रोजा रखने का सिलसिला शुरू जाएगा।
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अगर 18 जून से रोजा शुरू हुआ तो सुबह 3:36 मिनट पर सहरी का वक्त खत्म होगा। इसके बाद शाम 7:18 मिनट पर इफ्तार होगा। इस दौरान खाने-पीने की चीजों से पूरी तरह परहेज बरतना रहना होगा।

आखिर क्या है रमजान का मकसद?

longest roza came after 36 years

21 जून के बाद भूख और प्यास बर्दाश्त करने की मियाद बढ़कर 15 घंटे 45 मिनट तक पहुंच जाएगी, जो 9 जुलाई तक कायम रहेगी। यानी सुबह 3:36 बजे से लेकर शाम 7:20 बजे तक खाने-पीने की चीजों से दूर रहना होगा।

9 जुलाई के बाद शाम का वक्त घटने लगेगा, लेकिन लोगों को दो-तीन मिनट से ज्यादा की राहत नहीं मिलेगी। यानी ईद से पहले आखिरी रोजा शाम 7:17 मिनट पर खोला जाएगा। साफ है कि रोजेदारों के लिए इस बार 15 घंटे से लेकर 40-45 मिनट तक खाने-पीने की मनाही होगी। इससे पहले 1979 में जून माह के दौरान लोगों को सबसे लंबा रोजा रखना पड़ा था।

'मुसलमानों को भले ही इस बार सबसे लंबा रोजा रहना पड़ेगा, लेकिन उन्हें इसका सिला भी मिलना तय है। रमजान का मकसद लोगों के अंदर तकवा (परहेज की भावना) पैदा करना है। वे अपना ज्यादातर वक्त नमाज पढ़ने, कुरान की तिलावत और अल्लाह का जिक्र करने में गुजारें, वक्त का पता नहीं चलेगा। भूख और प्यास का एहसास भी ज्यादा नहीं होगा।'
--सैयद मासूम अली आजाद, शहर इमाम मुरादाबाद

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