चंदू की हत्या में ‘लोमड़ी’ को आजीवन कैद
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इलाहाबाद में अदालत ने दारागंज हिस्ट्रीशीटर शातिर अपराधी राजकुमार उर्फ लोमड़ी को चंदू निषाद की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
इसी मामले में एक अन्य अभियुक्त पप्पू को अदालत ने आरोप साबित नहीं होने पर बरी कर दिया है। सजा का आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामकुशल ने सुनाया। एडीजीसी राजेश कुमार गुप्ता ने मुकदमे में 11 गवाहों का परीक्षण कराया।
अभियोजन के अनुसार हत्या, लूट, डकैती जैसी अपराधों में लिप्त शातिर अपराधी लोमड़ी ने 26 फरवरी 2011 को शाम करीब साढ़े छह बजे चंदू निषाद को सड़क पर दौड़ा कर गोलियों से भून डाला था।
आजीवन कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा
सरेआम हुई इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। चंदू की लोमड़ी से पहले से रंजिश चली आ रही थी। घटना के दिन चंदू अपने घर से पान खाने के लिए निकला था, तभी लोमड़ी वहां आ गया। चंदू को देखते ही तमंचा लेकर उसे दौड़ा लिया। कुछ दूर जा कर उसे गोली मार दी। चंदू के परिवार के लोग भी शोर शराब सुनकर वहां पहुंच गए मगर वह भी उसे बचा नहीं सके।
प्राथमिकी चंदू के भाई प्रदीप निषाद ने दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने लोमड़ी को गिरफ्तार कर तमंचा बरामद कर लिया। विधि विज्ञान प्रयोग शाला की जांच से यह साबित हो गया कि चंदू को गोली उसी तमंचे से मारी गई थी।
अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। अवैध शस्त्र रखने के जुर्म में पांच वर्ष की कैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।