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लोकपाल बिल: एक साल के अंदर बनाना होगा लोकायुक्त

Sat, 24 Nov 2012 12:03 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 24 Nov 2012 12:03 AM IST
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lokayukta have to make within one year in lokpal bill

लोकपाल पर गठित सेलेक्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राज्यसभा में पेश कर दी है। सरकार को अब संशोधित लोकपाल विधेयक पेश नहीं करना होगा, बल्कि इसी रिपोर्ट पर सदन में चर्चा होगी। रिपोर्ट में लोकायुक्त गठित करने का मामला राज्यों पर ही छोड़ दिया गया है, लेकिन शर्त रखी गई है कि लोकपाल को लेकर अधिसूचना जारी होने के एक साल के भीतर सभी राज्यों को लोकायुक्त बनाना होगा।

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सीबीआई को मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव देने के साथ ही निदेशक की नियुक्ति कोलिजीयम से कराने की सिफारिश की है। सेलेक्ट कमेटी के चेयरमैन सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि लोकपाल बिल के स्वरूप की इन सिफारिशों पर भाजपा और कांग्रेस समेत लगभग सभी दलों की सहमति है।
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सर्वसम्मति से तैयार रिपोर्ट के राज्यसभा में पेश होने के बाद अब लोकपाल विधेयक पर संसद की मुहर लगने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। चतुर्वेदी ने कहा कि सदन चाहेगा तो इसमें भी संशोधन किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि विधेयक को लेकर 19 बिंदुओं पर आम राय नहीं थी। छोटे विवादों को निपटाने के बाद छह मुद्दों पर मुख्य ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि बाद में इन पर भी सहमति बन गई।
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समिति ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में शामिल करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार लोकपाल की नियुक्ति में प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर व विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के अलावा एक विधि विशेषज्ञ रहेंगे। विधि विशेषज्ञ का चयन समिति के बाकी चारों सदस्य मिलकर करेंगे। इसी तरह लोकपाल के चेयरमैन या सदस्य का निलंबन सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश या आंतरिक आदेश पर राष्ट्रपति करेंगे।

सीबीआई को मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इसमें निदेशक की नियुक्ति कोलिजीयम से कराने की सिफारिश शामिल है। कहा गया है कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मिलकर करेंगे। इसी तरह अभियोजन के लिए सीबीआई के तहत एक अलग निदेशालय बनाने का सुझाव दिया गया है।


इसके निदेशक की नियुक्ति केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर होगी। लोकपाल के भेजे मामलों की जांच करने वाले अफसरों का बीच में अथवा लोकपाल की मंजूरी के बिना तबादला नहीं हो सकेगा। सीबीआई लोकपाल की सहमति से वकीलों का अलग पैनल बना सकेगी। समिति में महिला, दलित, आदिवासी व पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व 50 फीसदी से कम नहीं होगा।

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