फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   lok sabha speaker allows debate on fdi with voting

FDI पर गतिरोध टूटा, नियम 184 के तहत बहस

Thu, 29 Nov 2012 03:16 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 29 Nov 2012 03:16 PM IST
विज्ञापन
lok sabha speaker allows debate on fdi with voting

रिटेल में एफडीआई पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध समाप्त हो गया है। सरकार लोकसभा में नियम 184 के तहत और राज्यसभा में 168 के तहत बहस के लिए राजी हो गई है। इसका मतलब साफ है कि बहस के बाद सदन में वोटिंग भी होगी। लोकसभा में इस मुद्दे पर 4 और 5 दिसंबर को चर्चा होगी, जबकि राज्यसभा में बहस की तारीख बाद में तय की जाएगी।

विज्ञापन


राज्यसभा के सभापति डॉ. हामिद अंसारी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक में यह फैसला लिया गया कि उच्च सदन में इस मुद्दे पर नियम 168 के तहत चर्चा होगी। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने बैठक के बाद बताया कि राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा कराई जाएगी जिसमें मतदान का प्रावधान है। लेकिन यह चर्चा कब होगी, इसका निर्णय राज्यसभा सभापति करेंगे।
विज्ञापन


इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने एफडीआई पर मतदान के प्रावधान वाले नियम 184 के तहत चर्चा कराने की मांग स्वीकार कर ली। इसके साथ ही इस मसले पर शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही जारी गतिरोध खत्म हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस मसले पर बृहस्पतिवार को उच्च सदन में जोरदार हंगामा हुआ। हंगामा थमता न देख सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। इधर भाजपा ने साफ कर दिया था कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के बाद मत विभाजन की मांग से पीछे नहीं हटने वाली है।

संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ के साथ लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली की बैठक में हालांकि कोई समाधान नहीं निकल पाया। इधर सपा और बसपा भी कह चुके हैं कि वे सरकार की फजीहत नहीं कराएंगे।


इससे पहले बुधवार को सुषमा और जेटली ने कमलनाथ से कहा था कि यदि सरकार के पास संख्याबल है तो वह मत विभाजन से क्यों भाग रही है। सुषमा ने कहा कि एनडीए लोकसभा में नियम 184 और राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा कराने की मांग पर अडिग है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed