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जीरो आवर के साथ शुरू हो लोकसभा की कार्यवाही
विजय गुप्ता/नई दिल्ली
Updated Thu, 08 Nov 2012 10:32 PM IST
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लोकसभा के प्रश्नकाल के समय को बदलने पर चले लंबे विचार मंथन के बाद अब शून्य प्रहर (जीरो आवर) के समय को बदलने के विचार सामने आने लगे हैं। इसकी पहल की है भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने।
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सिन्हा ने लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत ही शून्य प्रहर से करने का सुझाव लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को देते हुए एक पत्र लिखा है। सिन्हा ने अपने पत्र में कहा है कि शून्य प्रहर में प्रत्येक सांसद अपने क्षेत्र से संबंधित सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को उठाना चाहता है, जिसके कारण शोर-शराबा भी होता है और सभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ता है।
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उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को सुझाव देते हुए लिखा है कि सदन की कार्यवाही की शुरूआत शून्य प्रहर से की जाए। साथ ही इसमें उठाए स्थानीय महत्व के मुद्दों पर पहले अध्यक्ष की अनुमति ली जाए और स्वीकृत मुद्दों को ही सदन के समझ विचार के लिए रखा जाए। सिन्हा ने कहा है कि शून्य काल समाप्त होने के बाद प्रश्न काल को शुरू किया जाए। इससे न सिर्फ प्रश्नकाल के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा, बल्कि प्रश्नकर्ता को उत्तर भी विस्तार से मिल सकेंगे।
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गौरतलब है कि मीरा कुमार ने भी कुछ समय पहले प्रश्नकाल के बार-बार स्थगित किए जाने से चिंतित होकर इसका समय बदलने के लिए पार्टियों से विचार विमर्श किया था। उनकी यह कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी है।
अपने पत्र में सिन्हा ने संसद की कार्यवाही को साल में कम से कम 180 दिन चलाए जाने का सुझाव भी दिया है। इसके लिए उन्होंने संसद के नियमों में संशोधन के सुझाव भी दिए है, ताकि राष्ट्रपति नियमों के अनुसार लोकसभा की कार्यवाही को तय कैलेंडर के अनुसार आहूत करने के लिए कह सकें।
सिन्हा ने रूल कमेटी के सदस्य के रूप में अपने उपरोक्त विचारों को अध्यक्ष के ध्यानार्थ भेजा है। एक अन्य सुझाव में उन्होंने संसद की स्थाई समिति की बैठकों को मीडिया तथा अन्य इच्छुक लोगों के लिए खोलने का सुझाव दिया है।
मीडिया से गोपनीय रखने से उन सांसदों को बहुत नुकसान होता है जो जनता की नजरों में आने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। गोपनीयता के कारण ही अनचाहे रूप में सूचनाएं भी लीक होती हैं।