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दावोस में भी चला 'आप' का जादू

Thu, 23 Jan 2014 07:50 PM IST
एजेंसी/दावोस
एजेंसी/दावोस Updated Thu, 23 Jan 2014 07:50 PM IST
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Lok Sabha elections AAP dominate India discussions at Davos

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में आए उद्योगपतियों और कारोबारियों के बीच आम आदमी पार्टी ही चर्चा का विषय बनी रही।

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आलम यह रहा कि हर विदेशी उद्योगपति भारतीय उद्योगपतियों से सिर्फ अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी के बारे में जानने को ही उत्सुक दिखा।

सभी की दिलचस्पी इस बात में दिखी कि आगामी लोकसभा चुनावों में ‘आप’ का प्रदर्शन कैसा रहेगा। हालांकि ज्यादातर भारतीय उद्योगपति 'आप' के बारे में ऑन रिकार्ड टिप्पणी करने से बचते रहे।

कुछ भारतीय उद्योगपतियों ने यहां अपनी बातचीत में 'आप' को यह कह कर खारिज कर दिया कि यह सिर्फ दिल्ली की परिघटना है।

'आप' जिस तरह से अधिनायकवादी और भीड़ की राजनीति कर रही है, उसकी भारतीय लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।

फिर भी इन लोगों का मानना है कि आप ने देश के लोगों का ध्यान खींचा है और इसे खारिज नहीं कि या जा सकता क्योंकि यह पार्टी शासन में सुधार जैसे कुछ वाजिब मुद्दे उठा रही है।
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भारतीय उद्योगपति विदेशी निवेशकों को यह दिलासा दे रहे हैं कि भारत की ग्रोथ स्टोरी जारी रहेगी।

'आप' जैसी पार्टियों के आर्थिक नजरिये से इस पर कोई फर्क  नहीं पड़ेगा। लेकिन भारतीय उद्योगपतियों को उनके मुश्किल सवालों का भी जवाब देना पड़ रहा है।
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कई विदेशी निवेशक इस बात की आशंका जता रहे हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने वाला है। ऐसे में निवेश की संभावनाओं का क्या होगा।

सीआईआई (भारतीय उद्योग परिसंघ) के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि आर्थिक नीतियों के लिए राजनीतिक माहौल बेहद अहम होता है। इसलिए आम चुनाव उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।


जहां तक 'आप' का सवाल है तो उसके बारे में कोई फैसला देना जल्दबाजी होगी।

'आप' ने गवर्नेंस और जवाबदेही का अहम मुद्दा उठाया है और जो भी पार्टी सत्ता में आएगी उसे इन पर गौर करना होगा। उन्होंने कहा कि सीआईआई अन्य पार्टियों की तरह 'आप' से भी संबंध रखेगा।

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