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अभी चुनाव मैदान में उतरने के मूड में नहीं सांसद
हरीश लखेड़ा/नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Mar 2013 09:25 PM IST
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पहले तृणमूल कांग्रेस और अब द्रमुक के यूपीए सरकार से नाता तोड़ लेने के बाद लोकसभा चुनाव शीघ्र होने की अटकलें शुरू हो गई हैं, लेकिन ज्यादातर सांसद अभी चुनाव मैदान में उतरने के मूड में नहीं हैं।
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हालांकि सरकार की डावांडोल स्थिति को देखते हुए सांसद मानने लगे हैं कि अब चुनाव दूर नहीं है।
विपक्ष ही नहीं, खुद सत्ताधारी कांग्रेस भी मानने लगी है कि मौजूदा बजट सत्र के बाद चुनावी माहौल शुरू हो जाएगा। लगभग सभी राजनीतिक दल मानने लगे हैं कि अस्थिर राजनीतिक हालात में अब लोकसभा चुनाव को ज्यादा देर तक टाल पाना आसान नहीं है।
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भाजपा लंबे समय से कहती रही है कि लोकसभा चुनाव तय समय से पहले हो जाएंगे। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने है कहा कि सरकार अपने अंतर्विरोधों के कारण जल्द ही विदा हो जाएगी।
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माकपा के सीताराम येचुरी मानते हैं कि सरकार चुनावी मोड में आ चुकी है। इसीलिए वह महिला सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण जैसे प्रमुख विधेयकों को जल्द पारित करा लेना चाहती है।
वैसे ज्यादातर सांसद अभी चुनाव के मूड में नहीं दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि सांसदों का मूड भांपकर ही ज्यादातर दल सरकार गिराने की पहल करने से बच रहे हैं। संसद के केंद्रीय कक्ष से लेकर गलियारे में अब मुख्यतौर पर यही चर्चा है कि चुनाव कब होंगे।
सांसदों की बड़ी चिंता यह है कि समय से पहले चुनाव होने पर उनका पांच साल का कार्यकाल पहले ही खत्म हो जाएगा। वेतन भत्तों के साथ ही लालबत्ती का सुख छिन जाएगा।
फिर अगली बार संसद में लौटने की पूरी संभावना भी नहीं है। सांसद निधि के तहत इस साल मिलने वाले पांच करोड़ रुपये से भी हाथ धोना पड़ेगा।
समय से पहले चुनाव कराने के विरोध में सांसदों ने जमकर अपनी राय रखी, लेकिन ऑन रिकॉर्ड में बोलने से बचते रहे। केंद्रीय कक्ष में विभिन्न दलों के कई युवा सांसद इस बात से चिंतित थे कि उन्होंने सांसद निधि का पूरा पैसा खर्च नहीं किया है।
भाजपा के एक सांसद की दलील थी कि चुनाव लड़ने के लिए बहुत तैयारी की जरूरत पड़ती है। सपा के एक सांसद का कहना था कि जो चुनाव लड़कर संसद पहुंचते हैं उन्हें ही मालूम होता है कि कितना समय, पैसा व मेहनत चाहिए।