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कांग्रेस काली पट्टी बांधकर आई, सुमित्रा ताई हुईं नाराज

Wed, 22 Jul 2015 04:33 PM IST
Updated Wed, 22 Jul 2015 04:33 PM IST
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lok sabha and rajya sabha second day of mansoon session

मानसून सत्र के दूसरे दिन भी संसद के दोनों सदनों में कामकाज नहीं हो सका। कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मसलों पर केंद्र सरकार का विरोध जारी रखा।

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केंद्र ने विपक्ष के समक्ष बहस का प्रस्ताव रखा, लेकिन वे सभी आरोपी नेताओं के इस्तीफों पर अड़े रहे। नतीजतन शुरुआती घंटों के हंगामे के बाद ही दोनों सदन अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिए गए।
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ललितगेट मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस ने बुधवार को दोनों सदनों में सदन में विरोध जारी रखा। कांग्रेस संसदों ने लोकसभा में काली पट्टी बांधकर प्रवेश किया।
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हालांकि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस के इस रवैये की आलोचना की। लोकसभा में कांग्रेस ने कार्यस्थगन का प्रस्ताव भी रखा, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दिया।

जेटली ने ‌सुषमा स्वराज का जमक बचाव ‌किया

lok sabha and rajya sabha second day of mansoon session

राज्यसभा में वित्‍तमंत्री अरुण जेटली ने सुषमा स्वराज का बचाव करने की पुरजोर कोशिश की। सदन में उन्होंने बताया कि सुषमा स्वराज ने भाजपा संसदीय समिति की बैठक में अपना पक्ष रखा है। उन बातों को विपक्ष और देश को भी जानने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास तर्क नहीं, इसलिए वह हंगामा कर रहा है। विपक्ष तर्कों में कमजोर है और हंगामे में आगे। जेटली ने कहा कि कोई नहीं बता रहा कि विदेश मंत्री ने किस कानून का उल्‍लंघन किया है। उन्हें ये स्पष्ट करने की जरूरत है कि किस कानून का उल्लंघन किया गया है, जिस पर वह हंगामा कर रहे हैं।

राज्यसभा में विपक्ष की ओर से बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्षा मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दागी मंत्रियों को बचा रहे हैं।‌ विपक्षा के हंगामें के बीच राज्यसभा की कार्रवाई तीन बार स्‍थगित की गई। हालांकि जब विपक्ष नहीं माना तो कार्रवाई पूरे दिन के लिए स्‍थगित कर दी गई।

हंगामे की भेंट चढ़ गया था पहला दिन

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कांग्रेस ने मानसून सत्र के पहले दिन ही मोदी सरकार को अपने तेवर दिखा दिए ‌थे। मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही पर कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष का हंगामा कहर बन कर टूटा। कांग्रेस ने ललित गेट के मुद्दे पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का इस्तीफा मांगा तो व्यापमं घोटाले को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी बर्खास्त करने की मांग की।

सरकार ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह चर्चा कराने के लिए तुरंत तैयार है। वामपंथी दलों और समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस का खुलकर साथ दिया। कांग्रेस ने अपने रुख से साफ कर दिया कि उसकी नीयत संसद को चलने देने की नहीं है।

लोकसभा की कार्यवाही वर्तमान सदस्य दिलीप सिंह भूरिया और 13 पूर्व सदस्यों के पिछले दिनों हुए निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद दिन भर के लिए स्थगित हो गई। दूसरी तरफ राज्यसभा में कांग्रेस ने ललित मोदी विवाद उठाया और दिन का कामकाज स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की।

विपक्ष ने सरकार को सुनाई खरी-खरी

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राज्यसभा में पार्टी के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार सदन के प्रति जवाबदेह है। सरकार ने कामकाज में पारदर्शिता का वादा किया है। यह वादा तोड़ा गया है। ललित मोदी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 14 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। सरकारें बदलती हैं, कानून नहीं बदलते।

शर्मा ने आरोप लगाया कि ललित  मोदी को पत्नी से मिलने के लिए जो यात्रा दस्तावेज जारी किए गए उसका इस्तेमाल उन्होंने पर्यटन के लिए किया, जबकि उन्होंने कहा था कि उनकी पत्नी का कैंसर का इलाज चल रहा था। शर्मा के इन आरोपों के जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष से बहस शुरू करने के लिए कहा। जेटली ने कहा, चर्चा शुरू कीजिए, सुषमा स्वराज जवाब देंगी। मगर विपक्षी सदस्यों ने शोर शराबा शुरू कर दिया।

कांग्रेस सदस्य उपसभापति पी जे कूरियन के आसन के सामने आकर नारे लगाने लगे। सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो माकपा और सपा ने भी कांग्रेस का खुलकर समर्थन किया।

समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल और माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा यूपीए सरकार के दौरान जिस तरह मंत्रियों के इस्तीफों को लेकर संसद का कामकाज ठप किया गया और फिर इस्तीफे के बाद ही संसद चल सकी। उसी तरह अब एनडीए सरकार को वही परंपरा निभानी चाहिए। हंगमा थमता न देख राज्यसभा भी अंतत: पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

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