देश के दिग्गज कारोबारियों ने सरकार को दी चेतावनी
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देश की संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए जनता सामने आयी है। करीब 23000 लोगों ने ऑनलाइन पिटिशन पर हस्ताक्षर कर संसद में जारी सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध को समाप्त करने की अपील की है।
अपील करने वालों में आम जनता के अलावा दिग्गज कारोबारी आदि गोदरेज,राहुल बजाज, किरण मजूमदार शॉ और के गोपालाकृष्णन भी शामिल थे। कारोबारियों की हस्ताक्षर वाली इस पिटीशन में सभी दलों से गतिरोध समाप्त कर महत्वपूर्ण बिल पास करने की अपील की गयी।
साथ ही यह भी कहा गया कि देश की विकास दर को गति देने वाले जीएसटी बिल पर सहमति बनाने में सालों लग गए। इसे देश हित में पास करवाया जाए। उद्योगपतियों ने कहा है कि गतिरोध से खाद्य, सुरक्षा और अन्य आर्थिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है।
अन्य जिन लोगों ने यह पिटिशन साइन करी उनमें मुकुंड लिमिटेड के चेयरमैन राजेश शाह, हीरो के सुनिल कुमार मुंजाल,पुंज लायड के अतुल पुंज और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के वाइस चेयरमैन विकरम किर्लोस्कर शामिल थे।
सांसदों ने साधा विपक्ष पर निशाना
इस पिटिशन पर कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष के कुछ नेताओं ने कहा कि कार्पोरेट्स को सांसदों के खिलाफ बोलने का अधिकार नहीं है। जेडीयू सांसद शरद यादव ने कहा कि संसद पर देश के कैपिटलिस्टों का हमला यह साबित करता है कि मोदी सरकार कारोबारियों की सरकार है।
वहीं सीपीएम के सीताराम यचूरी ने कहा कि कारोबारियों को हमारे कार्य में दखल नहीं देना चाहिए। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्ववीट कर कहा कि कारोबारी चाहते हैं कि संसद पर राज करें। उन्होंने पूछा कि क्या ये कारोबारियों की संसद है।
तिवारी के सवाल पर बायोकॉन की किरण मजूमदार शॉक कहती हैं कि वह सरासर गलत हैं। कारोबारियों ने विपक्ष के खिलाफ पहले भी आवाज उठायी है और क्या वह नौकरियां देते हैं जो ऐसी बात कह रहे हैं?
साथ ही आईटी कंपनी इंफोसिस के पूर्व बोर्ड सदस्य टीवी मोहनदास पई कहते हैं कि संसद किसी पार्टी की निजी प्रापर्टी नहीं है। हम तब भी गलत बात की खिलाफत करते थे जब बीजेपी विपक्ष में थी। कांग्रेस जिसने देश में आजादी और संसद की स्थापना में अहम किरदार अदा किया उसे संसद की गरिमा को धूमिल नहीं करनी चाहिए।
कारोबारियों पर विपक्ष के हमले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि संसद पर अपनी राय रखने का उतना ही हक कारोबारियों को है जितना की समाज के अन्य वर्ग को।