सीट के लिए सपा में जुगाड़ लगा रहे कई दिग्गज
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों को लेकर सपा में लॉबिंग शुरू हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया चौधरी अजित सिंह भी लॉबिंग करने वालों में सबसे आगे हैं। अजित कांग्रेस और सपा का समर्थन हासिल करने की जुगत में हैं।
दूसरी तरफ सपा से पूर्व सांसद रेवती रमन सिंह, पूर्व मंत्री अशोक वाजपेयी, डा. सीपी रॉय, शफीकुर रहमान बर्क और नीरज शेखर समेत तमाम लोगों का नाम चर्चा में है। पूर्व सपा नेता अमर सिंह की मुलायम सिंह यादव से मुलाकात के बाद उनको राज्यसभा में भेजने की अटकलों को भी बल मिला है।
रालोद मुखिया अजित सिंह अपने पिता चौधरी चरण सिंह के लिए दिल्ली में राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान कर चुके हैं। अभी पिछले दिनों इसे लेकर उन्होंने इस मांग को लेकर एक रैली भी की थी।
रैली में सपा से शिवपाल यादव और कांग्रेस के कई नेता जुटे थे। सपा ने उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। इसके बाद से ही रालोद की ओर से राज्यसभा की सीट हासिल करने की कोशिश शुरू हो गई है।
अखिलेश यादव के दोस्त जाएंगे राज्ससभा?
रालोद ने कांग्रेस नेताओं से भी कहा है कि पिछली बार राज्यसभा सीटों के चुनाव में उसने कांग्रेस की मदद की थी। इसलिए इस बार उनकी मदद की जानी चाहिए।
रालोद ने कहा है कि अगर कांग्रेस और सपा उनकी मदद करती है तो वे यूपी विधान परिषद में उनको मदद दे सकते हैं। उधर, मोदी सरकार के खिलाफ सभी पार्टियों की एकजुटता की दुहाई देते हुए भी अजित सिंह को राज्यसभा भेजे जाने की पैरवी की जा रही है।
समाजवादी पार्टी के पास 230 विधानसभा सीटें हैं। पार्टी को दस में से छह सीटें पाने की उम्मीद है। मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए एक बार बैठक कर चुके हैं। अगले हफ्ते एक और बैठक होने की संभावना है।
नामांकन शुरू होने की तारीख तीन नवंबर और अंतिम तारीख दस नवंबर है। मतदान 20 नवंबर को होना है। सपा के टिकट दावेदारों में सीपी राय सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के इस भरोसे पर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि नेताजी ने कुछ समय पहले एक पुस्तक विमोचन समारोह में खुले तौर पर राय को राज्यसभा में भेजने की बात कही थी।
तो प्रमुख मुस्लिम चेहरों को साथ रखने की सियासत के हिसाब से बर्क को मौका दिए जाने पर मंथन चल रहा है। वहीं बलिया में अपने पिता पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सियासी विरासत बचाने में नाकाम रहे नीरज शेखर की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ दोस्ती की वजह से दावेदारी मजबूत आंकी जा रही है।