{"_id":"6cf57e32-daa1-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"lk-advani-stand-anti-narendra-modi","type":"story","status":"publish","title_hn":"आडवाणी को अब भी नरेंद्र मोदी मंजूर नहीं","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
आडवाणी को अब भी नरेंद्र मोदी मंजूर नहीं
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
Updated Sat, 22 Jun 2013 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी अब भी पार्टी के नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एकला चलो रणनीति के खिलाफ हैं।
विज्ञापन
शुक्रवार को श्याम प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी को उनकी सामूहिक नेतृत्व की कार्यशैली की याद दिलायी।
ऐसा कर उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी और संघ के तमाम विरोधों के बावजूद वह अभी भी सामूहिक नेतृत्व के तहत एनडीए का कुनबा बढ़ाने के हिमायती हैं।
इससे यह भी साफ हो गया है कि आडवाणी के मोदी विरोधी रुख में फिलहाल कोई नरमी नहीं आई है। आडवाणी ने पार्टी के दिग्गजों को मुखर्जी की सामूहिक नेतृत्व के प्रति आस्था की याद दिलाई।
उन्होंने कहा कि जनसंघ के जमाने में मुखर्जी ने कांग्रेस विरोधी मंच को मजबूत बनाने के लिए इसके साथ उड़ीसा जनतांत्रिक दल के छह लोगों को जोड़ा था।
हालांकि आडवाणी इसके बाद इस मसले के विस्तार में नहीं गए। मगर इतना कह कर उन्होंने खुद के मोदी विरोध पर डटे रहने का साफ और सीधा संकेत दे दिया।
आडवाणी मुखर्जी के बलिदान को याद करते हुए कई बार बेहद भावुक भी हुए। अपने लगभग 20 मिनट के भाषण के दौरान गला भर जाने के कारण उन्हें कई बार लंबे समय तक चुप रहना पड़ा।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि पार्टी में मोदी का कद बढ़ाने, उन्हें पार्टी का नया चेहरा बना कर एकला चलो की रणनीति के विरोध में बीते दिनों आडवाणी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
विज्ञापन
बाद में वह संघ प्रमुख के मनाने पर मान गए थे। संघ प्रमुख ने भी साफ कर दिया था कि संघ मोदी के मामले में कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है।
आडवाणी और भागवत की बैठक में साफ हो गया था कि संघ मोदी को आगे बढ़ाने के फैसले में न केवल शामिल है, बल्कि पार्टी के इस फैसले पर पूरी तरह उसके साथ खड़ा है।
पहले माना जा रहा था कि आडवाणी इस मुलाकात के बाद नरम पड़ सकते हैं। मगर बलिदान दिवस पर आडवाणी ने खरी खरी सुना कर साफ संकेत दे दिया कि फिलहाल वह अपने रुख से पीछे नहीं हटे हैं।