यूपीः जब घायलों को भेज दिया पोस्टमॉर्टम के लिए
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उत्तरप्रदेश में अलीगढ़ जिला अस्पताल में कार्यरत कुछ कर्मियों ने रविवार को दो घायलों को मृत बता कर पुलिस को मेमो भेज दिया, मेमो में दोनों के शवों को लेकर जाने की बात कही गई थी, जबकि हकीकत में दोनों जिंदा थे।
इस प्रकरण से अस्पताल की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बीती 20 अगस्त को खैर तहसील के सोफा गांव में अलीगढ़ पलवल रोड पर एक घुमंतू व्यक्ति को एक वाहन सवार ने टक्कर मार दी थी।
सीएचसी खैर के बाद जिला अस्पताल के वार्ड नंबर छह बेड नंबर चार पर इसको भर्ती कराया गया और इलाज शुरू हो गया। घायल अपना नाम पता नहीं बता सके इसलिए इसके परिजनों का कोई पता नहीं चला।
इसी बेड के ठीक पास एक अन्य एक्सीडेंट के घायल को भर्ती कराया गया। दूसरा घायल अपना नाम मोहित और निवास स्थान के नाम पर दुबे का पड़ाव बता रहा था। इन दोनों को जब खाना पीना भी नहीं मिला तो इनकी हालात और खराब हो गई। दोनों बेहोश हो गए।
तीन दिन तक मॉर्चरी में रखे रहे
29 अगस्त को डॉक्टरों ने युवकों को मृत घोषित कर दिया और दोनों के शरीर को मॉर्चरी भिजवा दिया गया। मॉर्चरी में शव की तरह ही दोनों घायल रखे गए और दरवाजे बंद कर दिए गए।
इसके बाद पुलिस को मेमो भेजा गया। पुलिस 72 घंटे तक दोनों युवकों की पहचान तलाशने में व्यस्त रहे और दोनों घायल युवक शवों की तरह मुर्दाघर में रखे रहे।
रविवार को जिला अस्पताल के कुछ कर्मियों ने दोनों की मौत का मेमो बना कर भेज दिया। सूचना मिलने पर सोफा के मामले में खैर से दरोगा दिनेश कुमार जिला अस्पताल पहुंचे और बेहोश को देखा तो पता चला कि वह जिंदा है।
दूसरे के बारे में भी यही जानकारी मिली तो उन्होंने इंस्पेक्टर बन्नादेवी को पूरा प्रकरण बताया। इस बीच मानव उपकार संस्था के विष्णु कुमार बंटी को इसकी जानकारी हुई और वह टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। दोनों को नहला धुला कर उनका वार्ड भी साफ कराया गया।
इन लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि मेमो किसने भिजवाया है, इसकी जांच होगी और कार्रवाई होगी।