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मौत से जूझते पिता को बेटी ने दिया जीवनदान

Sat, 04 Jan 2014 11:24 AM IST
शालू अग्रवाल/अमर उजाला, मेरठ।
शालू अग्रवाल/अमर उजाला, मेरठ। Updated Sat, 04 Jan 2014 11:24 AM IST
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Liver Transplant for father

जिस घर में दो बेटियां हों और बेटा कोई नहीं उन अभिभावकों को हर कदम पर सामाजिक हीनता का घूंट पीना पड़ता है। बचपन से ही मेरा सपना था, मैं इतनी काबिल बनूं कि मम्मी-पापा को कभी बेटे की कमी महसूस न हो। अपने पापा की जिंदगी बचाने का मौका भगवान ने मुझे दिया और मैंने वही किया जो समाज में हर बेटी करती है।

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बेटियों के प्रति नकारात्मक रुख अख्तियार करने वाले समाज के लिए 20 साल की प्रिया एक नज़ीर बन गई हैं। मेरठ के मेरठ कॉलेज में बीएससी की छात्रा प्रिया ने अपने पिता को अपना आधा लीवर देकर समाज में बेटियों का कद बढ़ाया है। समाज को यह संदेश भी दिया है कि बेटियां हरकदम पर बेटों से बढ़कर हैं।

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प्रिया के पिता हरीश चौधरी एलआईसी एजेंट हैं। संक्रमण फैलने के कारण उनका पूरा लीवर डैमेज हो चुका था। चिकित्सकों ने जीवित रहने के लिए लीवर ट्रांसप्लांट ही आखिरी रास्ता बताया। पिता को बचाने के लिए छोटी बेटी प्रिया ने यह कदम उठाया और अपना 70 फीसदी लीवरी अपने पिता को दिया। हरीश चौधरी के केवल दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी एमकॉम की पढ़ाई कर रही है।
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पढ़ाई से भी किया समझौता
जून 2013 में अपोलो दिल्ली में लीवर प्रत्यारोपण प्रक्रिया होनी थी। जून में ही प्रिया की बीएससी की मुख्य परीक्षाएं भी थीं। पिता के इलाज के कारण प्रिया को मुख्य परीक्षा से वंचित रहना पड़ा।

लेकिन होनहार बेटी के इस काम को देखते हुए विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति ने उसे बाद में मुख्य परीक्षाएं देने की अनुमति दे दी। अब दोनों बेटियां मिलकर पिता के ऑफिस की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं।

बेटियां हैं घर का चिराग
हरीश कहते हैं वाकई बेटियां घर का चिराग हैं। लोग उन्हें बोझ समझते हैं, लेकिन मुश्किल वक्त में बेटियां ही साथ देती हैं। मुझे अपनी बेटियों पर गर्व है। जिनकी खातिर मुझे नया जीवन मिला। मेरी बेटियों ने मेरी सोच बदल दी है।

बढ़ रहे हैं लीवर ट्रांसप्लांट के मामले
लीवर ट्रांसप्लांटेशन के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। यह गुर्दा प्रत्यारोपण की तरह एक सामान्य प्रक्रिया है। मेदांता और अपोलो इसके बड़े सेंटर है, मेरठ में फिलहाल यह सुविधा नहीं हैं। अमूमन ब्रेनडेड व्यक्तियों का लीवर ही ट्रांसप्लांट होता है।


गेस्टॉलोजिस्ट, डॉ. मलय शर्मा के अनुसार एक स्वस्थ युवा भी अपना आधा लीवर ट्रांसप्लांट कर सकता है। प्रत्यारोपण के बाद डोनर और मरीज दोनों के लीवर तत्काल प्रापर फंग्शिनिंग करने लगता है। ब्लड रिलेशन में ही लीवर ट्रांसप्लांट हो सकता है।

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