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'ऐसा तूफान जिन्दगी में कभी नहीं देखा'
Updated Sun, 13 Oct 2013 03:04 PM IST
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शनिवार रात, करीब नौ बजे जब फैलिन तूफ़ान ओडिशा तट से टकराया तो बीबीसी के संवाददाता और उनकी सहायक टीमें वहां पहुंच चुकी थीं।
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तूफ़ान सबसे पहले गोपालपुर पहुंचा था और उससे क़रीब 15 किलोमीटर दूर बेरहामपुर में बीबीसी की टीमें तैनात थी।
बिजली गुल हो चुकी थी और संपर्क के और साधन जैसे सैटेलाइट फ़ोन भी पूरी तरह काम नहीं कर रहे थे।
एक तरफ़ तूफ़ान का आवेग और दूसरी ओर अंधेरे से बढ़ता ख़तरा, बचने के लिए सबको वापस अपने होटल की ओर भागना पड़ा।
बिजली गुल, टूटता संपर्क
उसी दौरान दिल्ली ऑफ़िस को तूफान के आने की सूचना देने के लिए जब सलमान रावी ने फोन किया तो आवाज़ में बहुत घबराहट थी, वो बोले, “ऐसा तूफ़ान मैंने अपनी ज़िन्दगी में कभी नहीं देखा है, ये आवाज़ दिलो-दिमाग पर कई सालों तक बरक़रार रहेगी।”
सलमान ने बताया कि उनके होटल में पानी भर रहा था और खिड़कियां टूट गईं थीं।
उन्होंने कहा कि बिजली गुल होने की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा पर चीज़ों के टूटने और गिरने की आवाज़ें चारों तरफ़ से आ रही थी।
टूटते सिग्नल के साथ होती उस छोटी सी बातचीत के दौरान तेज़ हवाओं और बारिश की आवाज़ सुनाई पड़ रही थी।
आखिर सलमान रावी ने कहा अब उन्हें होटल के अंदर जाना ही होगा क्योंकि बाहर रहना ख़तरे से ख़ाली नहीं।
दिलो-दिमाग पर डर का साया
वहीं संजय मजूमदार ने अपने आसपास के घटनाक्रम की जानकारी देने के लिए सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर का इस्तेमाल किया।
भुवनेश्वर के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद संजय ने ट्वीट कर बताया, “कुछ बेहद डरावने पल...तेज़ हवाओं की वजह से तीन कोशिशों के बाद ही विमान लैंड कर पाया।”
संजय के मुताबिक इसके बाद भुवनेश्वर हवाई अड्डा बंद कर दिया गया।
हवाई अड्डे से बाहर निकले तो एक ट्वीट में लिखा कि सभी दुकानें बंद हैं, बिल्डिंगों पर ताला है और सड़कों पर सन्नाटा है।
कुछ ही घंटों में जब पाइलिन तूफ़ान गोपालपुर से टकराया, तो तेज़ हवाओं और बारिश की जानकारी के साथ-साथ संजय ने लिखा, “पाइलिन अपने पूरे आवेग में हमारे सर पर है, बाहर के शोर का आक्रोश दिलो-दिमाग पर छा गया है।”
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'फ्रिस्बी' की तरह झूलता विमान
बीबीसी की तीसरी टीम के साथ ऐन्ड्रयू नॉर्थ ओडीशा के तट पर तब पहुंचे जब फैलिन तूफ़ान बहुत करीब आ गया था।
एक ट्वीट में उन्होंने लिखा कि उनका विमान ‘फ्रिस्बी’ की तरह झूल रहा था और जब आखिरकार सुरक्षित लैंड किया तो लोगों ने पायलट के लिए तालियां बजाईं।
उसके बाद तूफ़ान का आंखोदेखा हाल उन्होंने कुछ ऐसे बयान किया, “जब हम पहुंचे तो भारी तबाही का मंज़र सामने था, शहर अंधेरे में डूबा था, हमारी गाड़ी की हेडलाइट की रौशनी कभी गिरे हुए पेड़ों पर पड़ती तो कभी बंद हो गईं सड़कों पर।”
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उन्होंने बताया कि तेज़ हवाओं में दुकानों के बोर्ड समेत बहुत सारा सामान तूफ़ान के वेग से चारों तरफ हवा में उड़ने लगा था।
दुर्गा पूजा और दशहरे की तैयारी में की गई सजावट भी चारों ओर बिखरी पड़ी थी।
ऐन्ड्र्यू ने बताया, “हमारे होटल की लॉबी पर काँच ही काँच बिखरा है, खिड़कियां टूट गई हैं और तूफ़ान उफान पर है, ये एक बहुत भयानक रात लग रही है।”