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काले धन की कवायद से क्या कुछ होगा हासिल?

Thu, 30 Oct 2014 05:22 PM IST
Updated Thu, 30 Oct 2014 05:22 PM IST
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काला धन मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को 627 खाताधारकों की जो सूची सौंपी है, उसमें राजनीति, उद्योग या सरकार से जुड़ा कोई भी बड़ा नाम शामिल नहीं है। सूची में स्विटजरलैंड की राजधानी जेनेवा स्थित एचसीबीसी बैंक के भारतीय खाताधारकों के नाम शामिल हैं। जून, 2011 में फ्रांस की सरकार ने ये सूची भारत को सौंपी थी।

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सूची में शामिल नामों को सार्वजनिक नहीं किया गया। सुप्रीम को कोर्ट ने कहा सूची को काले धन की जांच की रही एसआईटी ही खोलेगी। सूत्रों का कहना है कि सूची सौंपे दिए जाने के बाद भी ऐसी संभावना कम ही है कि काला धन वापस आ पाएगा।
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सूची में आधे नाम भारतीय नागरिकों के हैं और शेष एनआरआई हैं। जिन भारतीय के नाम है भी, उनके खातों में एंट्री बहुत पुरानी है। कई खातों में रकम भी बहुत ही मामूली है। ऐसे में ये उम्मीद करना बेमानी ही होगी कि काले धन के रूप मे बहुत बड़ी रकम की उगाही हो सकेगी।
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क्‍या कहते हैं जानकार

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सूची में जिन भारतीयों के नाम हैं, उनमें से लगभग 300 के खिलाफ आयकर विभाग ने टैक्स चोरी का मामला दर्ज करने की तैयारी कर ली है। लेकिन एनआरआई खाताधारकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने जो सूची सौंपी है, उनमें से अधिकांश खातों में 2006 से काफी पहले एंट्री की गई थी। आम तौर पर 1999 से 2004 के बीच खात से लेनदेन किया गया है। एक खाते में तो 1973 के बाद से एक भी बार एंट्री नहीं की गई है।

जानकारों का कहना है कि खातों में एंट्री का प्रारूप देखकर यही लगता है कि इनमें पांच करोड़ से लेकर 10 करोड़ तक रकम होगी। कालेधन पर जैसा हंगामा किया जा रहा है कि उस लिहाज से ये रकम बहुत ही कम है।

हाथ पर हाथ धरे बैठी रही सरकार

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जानकारों का कहना है कि य‌दि सरकार बहुत तेजी दिखाते हुए सभी खातों को फ्रीज कर दे और तो उसके हाथ बहुत बड़ी रकम नहीं लगने वाली है। मामले में कार्रवाई करने में इतनी देर की गई है कि अब उन खातों में शायद ही कुछ बचा होगा।

सरकार के हाथ ये सूची 2011 में लग गई ‌थी लेकिन वह अब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। जिनके खाते संदेह के घेरे में रहे होंगे, उन्होंने अब तक अपनी रकम इधर-उधर कर दी होगी।

उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 2011 में ही एसआईटी ग‌ठित करने का आदेश दिया था। सूत्रों का कहना है क‌ि सरकार सूची में शामिल खाताधारकों के खातों से रकम की उगाही स्विटजरलैंड के सहयोग से ही कर पाएगी, लेकिन उसकी संभावाना भी कम ही दिख रही है।

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