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अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर खतरा, कुत्तों की 'मौत' मरे शेर

Wed, 26 Nov 2014 01:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Wed, 26 Nov 2014 01:03 PM IST
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Lions Died of Incurable Disease - Lion Safari Project of Akhilesh Yadav in Trouble

इटावा के लॉयन सफारी में एक जोड़ा शेर की मौत होने के बाद अब जाकर बीमारी का पता चल पाया है। करीब सप्ताह भर पहले बरेली के आईबीआरआई से आई शेर विष्णु के ब्लड सैंपल की रिपोर्ट में बताया गया कि शेर कैनाइन डिस्टेंपर (सीडी) वायरस की चपेट में था।

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यह वायरस अमूमन कुत्तों पर पकड़ बनाता है, जो लाइलाज है। इसमें लकवा जैसे लक्षण होते हैं या फिर शरीर कांपने लगता है। इसे डांसिंग डिसीज भी कहा जाता है।

हैदराबादी शेर का जोड़ा जब 10 सितंबर को कानपुर के चिड़ियाघर से यहां लाया गया, उसके 13 दिन बाद ही यह जोड़ा बीमार पड़ गया था। यह बीमारी इतनी खतरनाक रही कि देश भर से बुलाए गए पशु चिकित्सक भी उन्हें ठीक नहीं कर पाए। पिछले दिनों पहले शेरनी लक्ष्मी की मौत हो गई। ठीक 17 दिन बाद नर शेर विष्णु भी काल के गाल में समा गया। चूंकि लॉयन सफारी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है, लिहाजा यह जोड़ा जब बीमार पड़ा तो प्रदेश सरकार ने इलाज के लिए सफारी प्रशासन को पूरी छूट दी।

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नहीं ठीक कर पाए कई डॉक्टर

Lions Died of Incurable Disease - Lion Safari Project of Akhilesh Yadav in Trouble

गुजरात, बरेली, बंगलूरू, मेरठ, कानपुर, आगरा से डाक्टरों को बुलाया गया। इंटरनेट के जरिए लंदन के डाक्टर से सलाह ली गई। सब कवायद अंधेरे में तीर चलाने जैसी रही। बीमार शेर व शेरनी के रक्त सैंपल बरेली के आईबीआरआई को भेजे गए। प्रयोगशाला से रिपोर्टें तो मिलती रहीं, लेकिन इलाज में लगे रहे डाक्टरों एवं सफारी के डायरेक्टर की मानें तो उनमें बीमारी के नाम का उल्लेख नहीं होता था। बगैर मर्ज को समझे बीमार शेरों का इलाज होता रहा।

अब जब दोनों शेर व शेरनी की मौत हो चुकी है, उसके बाद बरेली के आईबीआरआई प्रयोगशाला से शेर विष्णु की ब्लड रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के संक्रमण की बात कही गई है। सफारी के डायरेक्टर केके सिंह को फोन किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा।

बाद में सफारी में तैनात पशु चिकित्सक डॉ. कुलदीप दुबे ने फोन पर बताया कि बंगलूरू भेजी गई ब्लड रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। बरेली आईबीआरआई से शेर की ब्लड रिपोर्ट आई है, जिसमें सीडी वायरस के संक्रमण की बात कही गई है। कैनाइन डिस्टेंपर नाम का यह वायरस अमूमन कुत्तों में पाया जाता है। इस बीमारी का कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन 20 फीसदी कुत्ते इस बीमारी से उस स्थिति में बच जाते हैं, जिनका इम्यून पावर अच्छा होता है। वायरस का संक्रमण होने पर आमतौर ग्लूकोज की ड्रिप, एंटीबायोटिक दवाएं व विटामिन दी जाती हैं। जो इलाज कर सकते थे, वह हमने किया। इसे डांसिंग डिसीज भी कहते हैं, जिसमें शरीर कांपता रहता है।

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