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इन दो जानवरों से अडानी को हुआ 10,395 करोड़ का नुकसान

Thu, 06 Aug 2015 09:58 PM IST
Updated Thu, 06 Aug 2015 09:58 PM IST
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License of coal block of Adani grout cancelled in Australia

एक छिपकली और खतरनाक सांप ने ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े कोयला खदान के खनन के काम को रोक दिया है। इस काम के रुकने की वजह से भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी को करीब 16.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हो गया।

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क्वींसलैंड में स्थित कारमाइकल कोयला खदान दुनियाभर के सबसे बड़े कोयला खदानों में से एक है। लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले को अडानी की कंपनी ने ग्रेग हंट के कार्यालय से हुई 'तकनीकी कानूनी गलती' करार दिया है। दरअसल, पर्यावरणविदों ने पिछले साल अडानी की कंपनी को कारमाइकल कोयला खदान के खनन के लिए दिए गए लाइसेंस का विरोध किया था।
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उनका तर्क था कि इस लाइसेंस को जारी करने के पर्यावरण मंत्री ग्रेग हंट ने पर्यावरण नियमों की अनदेखी की गई है जिसके बाद अदालत ने अडानी के लाइसेंस को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि, जस्टिस अन्ना कैट्जमान ने उनके लाइसेंस को रद्द किए जाने का कारण नहीं बताया लेकिन इस लाइसेंस को चुनौती देने वाले मैके संरक्षण समूह ने बताया की हंट अपना पक्ष मजबूती से रखने में नाकाम रहें।
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अधिकतर कोयला भारत आता

License of coal block of Adani grout cancelled in Australia

लाइसेंस रद्द होने की वजह से अडानी को 16.5 बिलियन डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। समूह ने बताया कि हंट ने लाइसेंस जारी करते समय पर्यावरणविदों की सलाह की अनदेखी की। उन्होंने बताया कि जिस जगह पर यह कोयला खदान है वहां जानवरों की दो अति दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।

इनमें से एक 'द यक्का स्किंक' नामक जानवर है जिसे संघीय पर्यावरण विभाग ने एक 'अत्यंत दुर्लभ प्रजाति' घोषित कर रखा है और दूसरा है ऑर्नामेंटल सांप। लाइसेंस रद्द होने की कार्रवाई को लेकर अपील करने वाले पक्ष की वकील सु हिग्गिन्सन ने कहा कि इसका मतलब ये हुआ कि खदान का काम कानूनी तौर पर तबतक रूका रहेगा जबतक उसे फिर से लाइसेंस न दिया जाए। इस बात का भी खतरा बताया जा रहा था कि इससे समुद्र तट और उसके पास मौजूद प्राणियों को नुकसान होगा।


बताया जाता है कि अडानी की कंपनी कोयले के निर्यात के लिए एक बंदरगाह भी बनाने जा रही थी। इस खान से छह करोड़ टन कोयला निर्यात किया जाना था, जिसमें से ज्यादातर कोयला भारत आता। अपील करने वाले पक्ष ने यह भी तर्क दिया था कि खदान में सालाना 12 अरब लीटर पानी का इस्तेमाल किया जाता जो भूजल के स्तर को भी प्रभावित करेगा।

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