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अविश्वास की दीवार गिराने की कोशिश में दिखे ली

Tue, 21 May 2013 12:13 AM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
नई दिल्ली/गुंजन कुमार Updated Tue, 21 May 2013 12:13 AM IST
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li keqiang pull down the wall of mistrust

द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने भारत आए चीनी प्रधानमंत्री ली केचियांग देश के लोगों को भावनात्मक संदेश देने की कोशिश भी करते दिखे।

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ली ने ‘हिंदी चीनी भाई भाई’ के नारे के तत्काल बाद हुए युद्ध और लद्दाख क्षेत्र में हालिया घुसपैठ के कारण भारतीय जनमानस में चीन के प्रति बनी नकारात्मक छवि को धोने के लिए सीधे जनता की भावनाएं छूने की भी कोशिश की।
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उन्होंने कहा कि दुनिया की खुशहाली और बेहतरी चीन और भारत की मजबूत दोस्ती के बिना संभव नहीं है। ली इस दौरान 27 साल के युवा के तौर पर अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान दिल में दोस्ती के बीज पनपने की मधुर यादों का जिक्र करना भी नहीं भूले।
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ली अपने हाव-भाव से भी भारत के लोगों को संदेश देते हुए दिखे। उन्होंने रविवार दोपहर जब पालम हवाई अड्डे के टेक्निकल एरिया में भारत की जमीन पर पहली बार बतौर प्रधानमंत्री कदम रखा तो वह अकेले ही थे।

वह अपने विमान से लाव लश्कर के बिना अकेले बाहर निकले और उन्होंने स्वागत में खड़े मंत्रियों और अधिकारियों की ओर नहीं बल्कि वहां खड़े मीडिया की तरफ हाथ हिलाकर भारत की जनता से सीधा संपर्क साधने की कोशिश की।

सोमवार दोपहर को भी हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत और मीडिया ब्रीफिंग के पहले ही उन्होंने राष्ट्रपति भवन परिसर में समा बांध दिया।

दिल्ली की चिलचिलाती धूप में उन्होंने मीडिया के साथ दो तीन लाइनों में बात खत्म नहीं कर लंबी गुफ्तगू की। मीडिया से बात करने के दौरान वह चिंता मुक्त दिखे।

कूटनीति के तकाजे के तहत सटीक बॉडी लैंग्वेज का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने बगल में मौन खड़े अपने समकक्ष मनमोहन सिंह की तरफ बार-बार घूमकर उन्हें बातचीत में शामिल रखा।

ली ने कहा कि उनके भारत आने के तीन मकसद हैं- पहला, आपसी विश्वास कायम करना। दूसरा, आपसी सहयोग बढ़ाना और तीसरा भारत के साथ मिलकर भविष्य को संवारना।

ली ने कहा कि भारत और चीन दुनिया की दो सबसे पुरानी सभ्यताएं हैं। हैदराबाद हाउस में भी वह अपने दिली जुड़ाव का संदेश देते रहे। उन्होंने कहा कि 1987 में पहली भारत यात्रा के दौरान ही उनके दिल में दोस्ती का बीज फूटा था।


ली ने साफ संदेश दिया कि उन्हें इस बीज को दरख्त बनाने में भारत की मदद की जरूरत है। ली ने कहा कि उन्होंने अपनी यात्रा का पहला पड़ाव भारत को चुना क्योंकि उनकी नजर में भारत चीन का सबसे अहम पड़ोसी है। हैदराबाद हाउस में ली चीन के प्रति भारत की अति संवेदनशील मीडिया को संबोधित किए बिना नहीं रहे।

उन्होंने कहा कि भारत की मीडिया बहुत मेहनती है। लेकिन अब उसे सीमा विवाद से परे जाकर उन मुद्दों को भी उठाना चाहिए जो दोनों देशों की साथ तरक्की में सहायक हो।

उन्होंने मीडिया से वादा किया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के दौरान पूरी चीनी मीडिया बैनर के साथ उनका स्वागत करेगी।

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