मनरेगाः 3 प्रतिशत से कम को मिला 100 दिन का काम
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (मनरेगा) तहत देश के कितने लोगों को रोजगार देने में सरकार को कामयाबी मिली रही है इस पर आई रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
मनरेगा की कामयाबी और वास्तविकता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं लेकिन इस योजना पर आई 2015 की रिपोर्ट एक बार फिर से योजना के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर किया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मनरेगा के तहत 2015 के वित्तीय वर्ष में तीन प्रतिशत से भी कम परिवारों को 100 दिन का काम मिल पाया है। मतलब जिन लोगों के लिए यह योजना बनी है उनमें से 97 प्रतिशत लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
2011-12 में कितनों को मिला काम?
केंद्र सरकार ने 2006 में प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए कम से कम साल में 100 दिन का रोजगार देने के लिए योजना शुरू की थी। लेकिन एनडीए सरकार के आने के बाद इस योजना की उपयोगिता पर सवाल खड़ा हो गया था।
ग्रामीण विकास मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 2015 में महज 2.79 प्रतिशत लोग ही इस योजना के तहत काम करने आए हैं। हालांकि मनरेगा के हालात सुधरने के बाद ये आंकड़े सामने आए हैं जिसमें तीन प्रतिशत लोगों को काम मिलने की बात कही गई है।
गौरतलब है कि मनरेगा के तहत पिछले साल करीब 10 प्रतिशत लोगों को रोजगार देने की बात कही गई जबकि 2011-12 में कुल आठ प्रतिशत लोगों को ही इस योजना के तहत काम मिल सका है। इस योजना के असफलता का कारण मजदूरों को समय पर और उचित मजदूरी न मिलना माना जा रहा है।