'अंबेडकर जैसे महापुरुषों की विरासत किसी एक की बपौती नहीं'
बाबा साहब अंबेडकर के नाम पर सियासत करने वालों को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि महापुरुषों की विरासत किसी एक की बपौती नहीं हैं।
उन्होंने देश को महापुरुषों के प्रति नजरिया बदलने को कहा है। भागवत ने कहा है कि महापुरुषों को पिंजरे में कैद नहीं किया जा सकता है। महापुरुष किसी एक के नहीं हो सकते। महापुरुषों को जातिवाद और भाषावाद से उपर उठकर देखना होगा।
राष्ट्रीय सलाहकार परिषद एवं योजना आयोग से जुड़े रहे नरेंद जाधव के जरिए अंबेडकर पर लिखी पुस्तक का विमोचन करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि हमने महापुरुषों का व्यापार नहीं किया।
महापुरुषों को जाति अथवा प्रांत के बंधन से मुक्त रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशवासियों को महज संविधान नहीं बचा सकता है। बल्कि देश एवं समाज के लिए महापुरुषों के विचार भी जरूरी हैं।
भारत निर्माण का सपना अभी अधूरा
भागवत ने कहा कि भारत निर्माण का हमारा सपना अभी पूरा नहीं हुआ है। सपने को पूरा करने के लिए देश के उन सभी महापुरुषों के विचारों को समाहित करने की जरूरत है जिन्होंने राष्ट्र एवं समाज के लिए थोड़ा भी योगदान दिया है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे सभी महापुरुषों के विचार को समझें। भागवत ने कहा कि भारत के संविधान निर्माण में बाबा साहब के योगदान को कोई भुला नहीं सकता है।
समाज को बाबा साहब के जरिए दिए गए विचार और योगदान अतुलनीय हैं। मोहन राव भागवत ने कहा कि संघ से बाबा साहब का पुराना नाता रहा है। वे 1939 में तत्कालीन संघ प्रमुख से मिले थे। लेकिन संघ फोटों खिचवाने या दस्तावेज सहेज कर रखने में विश्वास नहीं करता है। इसलिए इस बात के लिखित प्रमाण नहीं हैं।
इस अवसर पर नरेंद्र जाधव ने कहा कि अंबेडकर को समाज में वह स्थान नहीं मिला। जिसके वे पात्र थे। उन्हें एक जाति विशेष से जोड़कर किनारे रख दिया गया है।