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एफडीआई पर संसद में सरकार को घेरेगा लेफ्ट

Fri, 16 Nov 2012 11:20 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 16 Nov 2012 11:20 PM IST
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left parties to oppose fdi in parliament

खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर लेफ्ट ने भी संसद में सरकार के घेराव का ऐलान किया है। माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि वे सरकार के फैसले के विरोध में प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसमें मतदान का प्रावधान होगा।

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अन्य वामपंथी पार्टियां भाकपा, आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लॉक ने भी इस मुद्दे पर एक स्वर में सरकार की नीतियों का विरोध करने और संसद के दोनो सदनों में उसका घेराव करने की बात कही है। पर सदन की कार्यवाही बाधित करने से जद-यू की तरह वामदलों ने भी इनकार किया है। भाजपा, बीजद और द्रमुक जैसी पार्टियों ने पहले ही एफडीआई पर संसद में सरकार के घेराव करने की घोषणा कर चुकी हैं।
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संसद सत्र से पहले रणनीति तय करने के लिए सभी वामपंथी दलों के साथ शुक्रवार को आयोजित संयुक्त बैठक के बाद येचुरी ने बताया कि अगले सप्ताह शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में एफडीआई के मुद्दे पर सरकार का दोनों सदनों में घेराव किया जाएगा।
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उन्होंने इस मुद्दे पर सभी दलों से संसद के दोनों सदनों में लाए जाने वाले प्रस्तावों का समर्थन करने की अपील की है। वामदल लोकसभा में नियम 184 और राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा के लिए प्रस्ताव पेश करेंगे। इन नियमों में चर्चा के बाद मतदान का प्रावधान है।

येचुरी ने कहा कि इस तरह के फैसले लेना कार्यपालिका का अधिकार है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने वाले किसी भी फैसले में संसद की राय दिखनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह संसदीय लोकतंत्र का उल्लंघन है। येचुरी के मुताबिक एफडीआई का फैसला लोगों के लिए काफी अहम है। चार करोड़ लोग सीधे तौर पर खुदरा कारोबार में लगे हुए हैं। वहीं करीब 20 करोड़ लोग इस पर निर्भर है। सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में लोग विस्थापित होंगे।

येचुरी ने कहा कि एफडीआई के अलावा सत्र के दौरान महंगाई, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों में विनिवेश, कृषि संकट और किसानों की आत्महत्या के मामले भी प्रमुखता से उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन और दिल्ली हवाई अड्डा संबंधी कैग रिपोर्टों पर भी संसद में चर्चा होनी चाहिए।


भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा कि द्रमुक ने भी एफडीआई के मुद्दे पर सरकार की खुलेआम आलोचना की है। अन्नाद्रमुक भी एफडीआई के विरोध में है। बैठक में येचुरी और राजा के अलावा बासुदेव आचार्य, अवनी राय और नरहरि महतो  उपस्थित थे।

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