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नेताजी की परीक्षा के लिए रणनीति तैयार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 02 Apr 2013 01:02 AM IST
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यूपीए सरकार पर दबाव बनाने में जुटे सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में खुद असमंजस में फंस सकते हैं।
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दरअसल वाम दलों ने अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव लाने का फैसला कर दो नावों पर सवारी कर रहे मुलायम को पूरी तरह अपने पाले में लाने की रणनीति बनाई है।
इनका मानना है कि इस रणनीति के कारण या तो मुलायम सरकार का साथ छोड़ने पर मजबूर होंगे, अन्यथा गैर यूपीए और गैर एनडीए की राजनीति में पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएंगे।
दरअसल सशक्त तीसरा मोर्चा खड़ा करने के लिए वाम दल सपा के साथ को अहम मान रहे हैं। इसलिए मुलायम की घेराबंदी कर सपा को अपने पाले में लाने की उनकी कोशिशें जारी हैं।
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सपा के हालिया सरकार विरोधी अभियान के बावजूद वाम दलों को मुलायम पर यकीन नहीं है। मगर मजबूरी यह है कि उनके बिना सशक्त तीसरा मोर्चा खड़ा नहीं हो पाएगा।
वामदलों का आकलन है कि गैर यूपीए-गैर एनडीए दलों में लोकसभा की सर्वाधिक सीटें सपा को मिल सकती हैं। यही कारण है कि वाम दलों ने अब इसके लिए मुलायम पर दबाव की रणनीति तैयार की है।
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वाम दलों के सूत्रों का कहना है कि कटौती प्रस्ताव पर होने वाले मतदान में साथ देने के लिए बीजेडी, एआईएडीएमके, टीआरएस, टीडीपी जैसे दल तैयार हैं।
कटौती प्रस्ताव का साथ देना राजग और तृणमूल कांग्रेस की भी मजबूरी बन सकती है। ऐसे में सपा के साथ आने पर यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की जमीन तैयार होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सपा अलग-थलग पड़ जाएगी।
लोकसभा में माकपा संसदीय दल के नेता बसुदेव आचार्य ने कहा कि सपा के बारे में यह जानना जरूरी है कि वह किसके साथ है। ऐसे में कटौती प्रस्ताव पर होने वाला मतदान स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर देगा। निश्चित रूप से हमारी तरह पूरा देश जानना चाह रहा है कि सपा का वर्तमान रुख महज सरकार पर दबाव बनाने का हथकंडा है या फिर सपा वास्तव में इस सरकार की जनविरोधी नीतियों से आजिज है।