ममता के खिलाफ केंद्र को मिला वाम दलों का साथ
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शारदा चिटफंड घोटाले को लेकर सियासी वार झेल रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। बनर्जी के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई में भाजपा को अब वाम दलों का भी साथ मिल गया है।
वाम नेता वैचारिक तौर पर बेशक भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भला-बुरा कहते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में अपने सबसे बडे़ राजनीतिक शत्रु के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए उन्हें भगवा परिवार रास आने लगा है। वाम नेताओं ने केंद्र सरकार से शारदा चिटफंड घोटाले की जांच में तेजी लाने की मांग की है।
सांसद सीताराम येचुरी की अगुवाई में वामपंथी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पीएम मोदी से मुलाकात कर घोटाले में ममता बनर्जी के खिलाफ जांच करने की मांग की।
साथ ही इन नेताओं ने पीएम से आग्रह किया कि अब तक इस मामले में जब्त की गई संपत्तियों का निपटारा कर धोखाधड़ी के पीड़ित लोगों के पैसे वापस करने के इंतजाम किए जाने चाहिए।
ममता के खिलाफ की जांच की मांग
बताया जा रहा है कि पीएम ने वाम नेताओं से उनके सुझावों और मांग पर गौर करने की बात कही है। इससे पहले ओडिशा के मामलों को लेकर वाम नेता डी. राजा वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात कर चुके हैं।
हालांकि टीएमसी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तृणमूल नेता सुखेंदु शेखर रॉय का कहना है कि वाम दलों ने भाजपा के साथ हाथ मिला लिया है। जो लोग 34 साल तक राज्य में शासन में रहे और जिनके कार्यकाल में चिटफंड कंपनियां पनपी वे अब हमारी मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुताबिक किसी को जेल भेजने का फैसला उसके व्यवहार के आधार पर किया जाता है, लेकिन लगता है अब राजनीतिक प्रतिबद्धता को भी जेल भेजने का आधार बनाया जा रहा है। यह राजनीतिक प्रतिशोध का जरिया बन रहा है और हर किसी को जेल भेज दिया जाएगा।