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'बंदूक छोड़ लोकतांत्रिक रास्ता अपनाएं नौजवान'

Mon, 10 Jun 2013 10:44 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 10 Jun 2013 10:44 PM IST
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leave gun follow democratic path says manmohan

छत्तीसगढ़ में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या से स्तब्ध राजनीतिक दलों ने नक्सल प्रभावित राज्यों के नौजवानों से बंदूक छोड़ने की अपील की है।

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सोमवार को नक्सल समस्या पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर नौजवानों से अपने लक्ष्य को लोकतांत्रिक तरीके से हासिल करने को कहा।
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में हुई इस बैठक में सरकार ने वादा किया कि वह नौजवानों में व्याप्त अन्याय की भावना को संवेदनशीलता के साथ देखेगी, लेकिन इसके लिए उन्हें बंदूक छोड़कर लोकतांत्रिक तरीका अपनाना होगा।
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सरकार ने यह भी वादा किया कि नक्सल प्रभावित इलाकों को मुख्यधारा से जोड़कर वहां तरक्की और सशक्तिकरण के हर उपाए किए जाएंगे।

बैठक की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर नक्सलियों के डर और आतंक के चलते राजनीतिक गतिविधियों पर अंकुश लगा तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था चरमरा जाएगी।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी नेताओं पर हमले को अति गंभीर वाकया बताते हुए प्रधानमंत्री ने सभी दलों से इस चुनौती से निबटने में सहयोग की अपील की।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर पहली बार इस तरह हमला किया गया है। यह देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा आघात है। सरकार इस हिंसक तरीके को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।


बैठक में पारित प्रस्ताव में सीपीआई (माओवाद) को गैर कानूनी संगठन करार देते हुए उसके लक्ष्य को सबसे खतरनाक बताया गया।

प्रस्ताव के मुताबिक देश के लिए सीपीआई (माओवाद) की हिंसक तरीके से सत्ता हासिल करने के लक्ष्य से खतरनाक कुछ भी नहीं हो सकता।

प्रधानमंत्री ने नक्सल समस्या के निबटने के लिए सरकार की दोहरी नीति का ब्यौरा भी दिया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों की तरक्की के साथ नक्सलियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की योजना पर काम कर रही है।

उन्होंने राज्यों से भी इसी योजना पर काम करने की गुजारिश की है, ताकि केंद्र और राज्यों की योजनाओं में एकरूपता बनी रहे। प्रस्ताव में सभी दलों ने नक्सलियों के खिलाफ एकजुट रहने पर सहमति जताई।

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