फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   leaders trying to woo voters in last moments

मोदी को अपनी सीट से क्यों दूर रखना चाहते हैं गडकरी?

Tue, 08 Apr 2014 01:14 PM IST
Updated Tue, 08 Apr 2014 01:14 PM IST
विज्ञापन
leaders trying to woo voters in last moments

ऑरेंज सिटी नागपुर के तापमान में इन दिनों चुनावी गर्मी सहज महसूस हो जाती है। लोकसभा चुनाव में यहां भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। कहने को नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमि है, लेकिन इस पर कब्जा कांग्रेस का है।

विज्ञापन


नागपुर लोकसभा सीट के अब तक 15 चुनावों में से 12 बार कांग्रेस ने ध्वज फहराया है। जबकि भाजपा के माथे पर मात्र एक बार तिलक लगा। बनवारीलाल पुरोहित ने भाजपा को 1996 में जीत दिलाई थी। विडंबना यह कि पुरोहित भी मूल रूप से कांग्रेसी थे।
विज्ञापन


इस बार भी सीट पर कांग्रेस का दावा कमजोर नहीं है। लगातार चार चुनाव (1998, 1999, 2004, 2009) जीत चुके विलास मुत्तेमवार ने नागपुर शहर में सड़कों-पुलों-इमारतों का जो काम करवाया वह दिखता है। लेकिन मुश्किल यह है कि आम आदमी के बिजली, पानी, बेरोजगारी जैसे सवालों का उनके पास जवाब नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कांग्रेस के परंपरागत वोट काटने की कोशिश

leaders trying to woo voters in last moments

मुत्तेमवार नागपुर के लोगों के लिए जहां बहुत जाने पहचाने हैं, वहीं गडकरी को जनता के करीब होने के लिए खूब पसीना बहाना पड़ रहा है। गडकरी ने जनसंपर्क के लिए एक खास ढांचा तैयार किया है, जिसमें भाजपा और संघ के उनके करीबी कार्यकर्ता शामिल हैं।

ये लोग झोपड़पट्टियों और उन इलाकों में लगातार सक्रिय हैं, जहां से कांग्रेस को परंपरागत रूप से वोट मिलते हैं। साथ ही गडकरी भाजपा के शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह जैसे नेताओं के साथ स्मृति ईरानी और विवेक ओबेराय जैसे ग्लैमरस चेहरों को भी अपने समर्थन में ला रहे हैं।

चर्चा है कि गडकरी नहीं चाहते थे कि मोदी उनका प्रचार करें, इसलिए वह यहां नहीं आए। गडकरी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले विधानसभा चुनाव लड़ने का भी उनके पास मात्र एक अनुभव है, जब वह 1985 में पश्चिमी नागपुर की सीट से हार गए थे।

रामनवमी को शक्ति प्रदर्शन का बहाना

leaders trying to woo voters in last moments

 गडकरी यहां संघ के सहारे हैं। संघ के प्रभाव वाले ब्राह्मण और उच्चवर्ग को वोटों का उन्हें भरोसा है। लेकिन उन्हें डर आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार अंजली दमानिया से है। भ्रष्टाचार को मुद्दा बना कर वोट मांग रहीं दमानिया के निशाने पर शुरू से गडकरी हैं।

जहां तक आम जनता का सवाल है उसे मुत्तेमवार और गडकरी समान रूप से दूर दिख रहे हैं। ऐसे में दोनों नेता अपनी जीत को पक्का नहीं मान सकते। अत: दोनों तात्कालिक लुभावनी बातों से वोटर को लुभाने के प्रयास में हैं।

पिछले हफ्ते एक प्रिटिंग प्रेस से (जो मुत्तेमवार की बताई जाती है) तीन-तीन हजार रुपये के 77 पैकेट चुनाव आयोग की एक टीम ने बरामद किए। टीम को मौके पर एक हजार खाली लिफाफे भी मिले। क्या यह वोटिंग से पहले आजमाए जाने वाले हथकंडों का संकेत हैं? नागपुर में भगवान राम के मंदिर बड़ी संख्या में हैं। रामनवमी (8 अप्रैल) कांग्रेस-भाजपा के लिए शक्ति प्रदर्शन का बहाना बनेगी।

नागपुर में 'आप' की संभावनाएं

leaders trying to woo voters in last moments

आम आदमी पार्टी के लिए नागपुर में जगह तो थी लेकिन उसकी उम्मीदवार (अंजली दामानिया) कमजोर है। यह नागपुर के लोगों की आम धारणा है। कई लोग आप को सिर्फ दिल्ली की पार्टी मानते हैं।

उनका कहना है कि अगर अरविंद केजरीवाल मोदी के खिलाफ लड़ने के बजाय नागपुर से गडकरी के खिलाफ लड़ते तो अवश्य जीतते। कारण यह कि पानी-बिजली और बेरोजगारी दिल्ली की तरह ही नागपुर में बड़े मुद्दे हैं, जिन पर मुत्तेमवार ने कभी ध्यान नहीं दिया और गडकरी से लोगों को आशा नहीं है।

वैसे आप के लिए यहां उम्मीद की किरण के रूप में मुस्लिम मतदाता उभर रहे हैं। पार्टी को नागपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में अच्छा समर्थन मिल रहा है।

भाजपा जीती तो बदलेगी संघ की रणनीति

leaders trying to woo voters in last moments

जिस तरह से चुनावी सर्वेक्षण भाजपा की जीत एनडीए की सरकार बनने के संकेत दे रहे हैं उससे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उत्साह में है। सूत्रों के अनुसार जीत के बाद की रणनीति क्या होगी इस पर संघ ने विचार करना शुरू कर दिया।

बताया जा रहा है कि जीत के बाद भाजपा में अपना प्रभाव और बढ़ाने के लिए संघ अपने ज्यादा से ज्यादा लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलवाएगा। सूत्रों की मानें तो एनडीए के सरकार में आने के बाद संघ के कम से कम 2000 लोग भाजपा में शामिल होंगे।

वैसे महाराष्ट्र भाजपा के प्रमुख देवेंद्र फड़नवीस ने इस बात का खंडन किया है और कहा है कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा, ‘संघ भाजपा के कामों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता। न ही संघ की तरफ से ऐसे कोई संकेत हमें मिले हैं कि सरकार बनने क बाद उसका हस्तक्षेप का इरादा है।

नागपुर लोकसभा सीट और वोटरों का आंकड़ा

leaders trying to woo voters in last moments

नागपुर संसदीय सीट 1951 में बनी। इसके अंतर्गत छह विधानसभा सीटें है: पूर्वी नागपुर, दक्षिणी नागपुर, दक्षिण-पश्चिमी नागपुर, मध्य नापुर, पश्चिमी नागपुर और उत्तर नागपुर।

नागपुर में वोटरों की संख्या
-16 लाख 43 हजार 197

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed