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चुनावी भाषणों में कौन है किसके निशाने पर?

Wed, 09 Apr 2014 03:11 PM IST
विकास पांडे/बीबीसी मॉनिटरिंग
विकास पांडे/बीबीसी मॉनिटरिंग Updated Wed, 09 Apr 2014 03:11 PM IST
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भारतीय जनता पार्टी ने विवादास्पद नेता नरेंद्र मोदी को सितंबर में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जबकि कांग्रेस ने राहुल गांधी को जनवरी में चुनाव अभियान समिति का मुखिया बनाया। राहुल गांधी अपनी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री के उम्मीदवार भले न हों लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि कांग्रेस उनके नेतृत्व में ही चुनाव लड़ रही है।

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भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दे पर राजनीति में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में उतरी आप (आम आदमी पार्टी) ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।तीन साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की शुरुआत के बाद बीते साल दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने शानदार शुरुआत की।
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आम चुनाव के दौरान तीनों पार्टियों के नेता देश भर का दौरा कर रहे हैं, लोगों से मिल रहे हैं और भाषण दे रहे हैं। लेकिन ये लोग अपनी रैलियों में आम लोगों से क्या कह रहे हैं। हमने इसे वर्ड क्लाउड के जरिए समझने की कोशिश की है।

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मोदी के लिए विकास और भारत

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मोदी अपने भाषण में भारत के प्रति अपने नज़रिए की बात सीधे तौर पर करते हैं। वहीं अपने विरोधियों की ज़्यादा चर्चा नहीं करते। मोदी अपने भाषण में विकास और भारत का नाम सबसे ज़्यादा लेते है।

गुजरात के मुख्यमंत्री अपने भाषण में अमूमन विकास, युवा और सुशासन पर ज़ोर देते हैं। मोदी मतदाताओं से कहते हैं कि वह प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद अपने राज्य के तौर तरीक़ों के देश भर में लागू करना चाहते हैं।

उन्हें गुजरात के विकास का श्रेय मिलता है लेकिन 2002 के दंगों का अतीत भी उनसे चिपका हुआ है। साल 2002 में मोदी के शासन के दौरान गुजरात में हुए दंगों में कम से कम एक हज़ार लोग मारे गए थे।

राष्ट्रवादी भावनाओं को उभार

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मोदी अपने भाषणों में दंगों की चर्चा करने से बचते हैं और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधते हैं। मोदी नेहरू-गांधी परिवार की ख़ूब आलोचना करते हैं और कहते हैं कि एक ही परिवार देश नहीं चला सकता।

कई विश्लेषक यह मानते हैं कि मोदी पार्टी के पुरानी विचारधारा हिंदुत्व से अलग राह अपना रहे हैं। वह भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की बात करते हैं, जिसमें बेहतर आर्थिक विकास दर, राष्ट्रीय सुरक्षा में सुधार और महिलाओं को बेहतर सुरक्षा का वादा भी शामिल है।

लेकिन मोदी विदेश नीति पर ज़्यादा बात नहीं करते लेकिन चीन और पाकिस्तान का नाम लेते हैं। वह पाकिस्तान और चीन से ख़तरों की बात करके राष्ट्रवादी भावनाओं को उभार रहे हैं। वह कहते हैं, "भारत को अपने पड़ोसी देशों से आने वाले ख़तरे के लिए तैयार होना चाहिए।"

चुनाव अभियान का चेहरा मात्र हैं राहुल गांधी

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राहुल गांधी उस पार्टी के चुनाव अभियान का चेहरा हैं जो बीते एक दशक से उनकी मां सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में शासन कर रहा है। इस दौरान मनमोहन सिंह की सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे और विश्लेषकों के मुताबिक़ इसके चलते कांग्रेस पार्टी की लोकप्रियता घटी है।

राहुल गांधी के भाषणों का वर्ड क्लाउड बताता है कि वह अपने भाषणों में पार्टी के अंदर लोकतंत्र और बेहतर शासन की बात ज़्यादा करते हैं। वे अपनी पार्टी की उन नीतियों के बारे में बात करते हैं जो ग़रीब लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। वह खाद्य सुरक्षा के अधिकार की बात करते हुए बताते हैं कि इससे देश की दो तिहाई आबादी को सस्ता भोजन मिलेगा।

राहुल अपने भाषणों में मोदी का नाम लेने से बचते हैं लेकिन बार-बार दोहराते हैं कि एक आदमी देश की समस्याओं का हल नहीं कर सकता। कांग्रेस के उपाध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी को करिश्माई नेता माना जाता है और वह यह दिखाने की कोशिश भी करते हैं कि पार्टी का चुनावी अभियान उनके नियंत्रण में है।

वह अपने भाषण में हमेशा नए भारत की बात करते हैं और ग़रीबों के सशक्तिकरण की बात करते हैं। राहुल भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस की बात भी करते हैं। इसके अलावा अपने भाषणों में अपनी मां सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ज़िक्र करते हुए बीते दस साल की सफलता का श्रेय उन्हें देते हैं।

केजरीवाल का निशाना कॉरपोरेट घराना

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अरविंद केजरीवाल अपने भाषणों में नेताओं, नौकरशाहों, बड़े कॉरपोरेट घरानों और मीडिया में भ्रष्टाचार की बात करते हैं। वह भारत को भ्रष्टाचार से आज़ादी दिलाने की ज़रूरत बताते हुए लोगों से अपील करते हैं कि वे भ्रष्ट राजनेताओं और अधिकारियों को सज़ा सुनाएं।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री राष्ट्रीय राजनीतिक दलों, कॉरपोरेट घरानों और मीडिया में सांठगांठ की बात भी करते हैं। अपने भाषणों में केजरीवाल आम आदमी से जुड़े मुद्दे की बात भी करते हैं। इसमें पानी की कमी, बिजली और गैस की बढ़ती क़ीमतें भी शामिल हैं।

वह आम लोगों से भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपनी मुहिम को समर्थन देने और भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को रोकने की मांग करते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल को उम्मीद है कि उनकी कोशिशों से आम आदमी उनकी पार्टी के क़रीब आ सकता है।

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