राहुल से नाखुश नेता सोनिया के दरबार में
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लोकसभा चुनाव की करारी हार ने कांग्रेस के पुराने नेताओं के भीतर राहुल गांधी के नेतृत्व के प्रति असंतोष और गहरा कर दिया है। ये नेता राहुल के रंग-ढंग से खुश नहीं हैं। यही वजह है कि पुराने नेताओं ने सोनिया गांधी से मुलाकात कर राहुल के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं और उनके भविष्य के बारे में जानना चाहा है।
पार्टी के अंदर राहुल के काम करने की तरीके के प्रति पुराने नेताओं में मोहभंग की स्थिति है। उनकी नजर में राहुल पार्टी के कामकाज को लेकर अनमने हैं। पार्टी और राष्ट्रीय मुद्दों पर वह नेताओं से बहुत कम बात या संवाद करते हैं।
लोकसभा में पार्टी का नेतृत्व करने से पीछे हटने के बाद राहुल की ओर से इसे संकट से बाहर निकालने की शायद ही कोई पहल या रणनीति पेश की गई है। राहुल पूरी तरह हताश हो चुके कार्यकर्ताओं में जोश भरने और उनमें विश्वास जगाने की कोशिश करते नजर नहीं आए।
राहुल गांधी की गंभीरता पर सवाल
दिग्विजय सिंह, गुलाम नबी आजाद, कमलनाथ जैसे पुराने और युवा तुर्क मिलिंद देवड़ा जैसे नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर तो चुप्पी साध रखी है लेकिन निजी तौर पर मिलने पर वे कांग्रेस का नेतृत्व करने में राहुल की गंभीरता पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल के भविष्य को लेकर सोनिया से मुलाकात के सवाल पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हमें सोनिया जी से राहुल के भविष्य के बारे में जवाब चाहिए।
पार्टी को इस तरह दिशाहीन नहीं छोड़ा जा सकता। राहुल गांधी को वरिष्ठ नेताओं से मिलकर पार्टी का नेतृत्व करने में अपनी गंभीरता को लेकर विश्वास दिलाना होगा। उन्हें नेताओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे आगे बढ़ कर नेतृत्व करना चाहते हैं और इस बारे में उनके क्या इरादे हैं।
पार्टी को इस साल के दूसरे हिस्से में चार अहम राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के बारे में उनके मकसद के बारे में कुछ भी पता नहीं है। इसे कहीं से भी अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता। हमें इस लड़ाई के लिए उठ खड़ा होना होगा लेकिन अब तक न तो 10 जनपथ और न ही राहुल गांधी की ओर से से इस संबंध में तैयारियों का कोई संकेत मिल रहा है।’
राहुल गांधी के साथ क्या है दिक्कत
दरअसल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को लग रहा है कि राहुल न तो भाजपा की चुनौतियों का सामना करने को तैयार हैं और न ही आने वाले महीनों के दौरान होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी का आगे बढ़ कर नेतृत्व करने के लिए।
पार्टी के अंदर कइयों को मानना है कि सोनिया को इस मामले में राहुल से खुल कर बात करनी चाहिए और फिर कोई फैसला लेना चाहिए ताकि पार्टी की बिगड़ी तस्वीर संवारने के कदम उठाए जा सकें।
हार के बाद अपनी दिशा खो चुकी कांग्रेस ने हाल में लोकसभा में कुछ तेवर दिखाए लेकिन इसके बाहर वह कोई करिश्मा नहीं कर पाई है। सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस नदारद है।
पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा करने के लिए बनी एंटनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और हो सकता है कि इससे एआईसीसी में कुछ फेरबदल देखने को मिले। कुछ राज्य इकाइयों के अध्यक्षों को हटाया जा सकता है। लेकिन अहम मुद्दा पार्टी नेतृत्व के भविष्य और इसमें नई जान फूंकने का है।
भविष्य में होने वाले चुनाव बड़ी चिंता
पार्टी के एक और नेता कहते हैं, ‘पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बहुत कम मौकों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत है। मौजूदा और पूर्व सांसदों और राज्य इकाइयों के अध्यक्षों से भी उनकी बातचीत कम रही है।
उन्हें इस काम का जिम्मा मधुसूदन मिस्त्री पर छोड़ने के बजाय खुद करना चाहिए। राहुल की संवाद क्षमता बेहद कमजोर है। पार्टी के उच्च नेतृत्व तक पहुंच और उनसे संवाद के मामले में स्थिति एक बार फिर पहले जैसी हो गई है।
राहुल को एक काफी मजबूत चौकड़ी घेरे हुए है और अब इसे हटाना होगा। इसके बगैर पार्टी आगे भी खराब प्रदर्शन करती रहेगी। चिंता हरियाणा और महाराष्ट्र में होने वाले चुनावों के लेकर है। यहां पार्टी के खराब प्रदर्शन की आशंका है और ऐसा हुआ तो यह इसके लिए बेहद विध्वंसक साबित होगी।