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कोर्ट के फैसले से उड़े कईयों के होश

Sun, 28 Sep 2014 08:13 AM IST
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 28 Sep 2014 08:13 AM IST
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leaders in trouble after verdict against jayalalithaa.

आय से अधिक संपत्ति मामले में तमिलनाडु की सीएम जयललिता को चार साल की कैद और 100 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा सुनाए जाने से कानूनी फंदे में फंसे नेताओं के होश उड़ गए हैं। जयललिता से पहले लालू प्रसाद यादव, ओम प्रकाश चौटाला, ए. राजा, कनिमोझी, दयानिधि मारन, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा, रशीद मसूद, सुरेश कलमाड़ी और येदियुरप्पा समेत कई बड़ी हस्तियां कानून के फंदे में फंस चुकी हैं। इन बड़ी शख्सियतों का राजनीतिक कैरियर दांव पर लग गया है। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत दोष साबित होने पर छह साल तक चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है।

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चारा घोटाले में दोषी साबित हुए और जेल जा चुके लालू यादव जमानत पर हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फंसे द्रमुक नेता ए. राजा, कनिमोझी और दयानिधि मारन भी जमानत पर हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले में दोषी ओम प्रकाश चौटाला स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर हैं। उनके बेटे भी जेल की हवा खा चुके हैं। उनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मामला चल रहा है। आय से अधिक संपत्ति मामले में भी उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट में मामला चल रहा है।

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सांसद रिश्वत कांड में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और खनन घोटाले में पूर्व सीएम मधु कोड़ा भी जेल जा चुके हैं। राष्ट्रमंडल खेल घोटालों में सुरेश कलमाड़ी भी जमानत पर हैं। भले ही ये राजनीतिक दागी जमानत में बाहर हैं, लेकिन इनका राजनीतिक कैरियर लगभग खात्मे की ओर है। इन बड़ी हस्तियों पर कानून का शिकंजा कसने के बाद गंभीर आरोपों में फंसे अन्य नेताओं के भी होश उड़ गए है।
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जयललिता पर फैसले से राजनीतिक हड़कंप

leaders in trouble after verdict against jayalalithaa.

आय से अधिक संपत्ति मामले में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को सजा होने के बाद राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जयललिता के खिलाफ कोर्ट में शिकायत करने वाले भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी का रुख फैसला आने के बाद भी आक्रामक है लेकिन उनकी पार्टी भाजपा ने राजनीतिक मजबूरियों के तहत कोई सीधी बात करने से परहेज किया है। भाजपा ने इस मामले को अदालत का विषय बताकर पल्ला झाड़ लिया। दूसरी तरफ कांग्रेस ने कहा है कि अदालत के फैसले के बाद जयललिता किसी भी सूरत में मुख्यमंत्री पद पर नहीं रह सकती।

कोर्ट के फैसले के बाद स्वामी ने कहा कि उन्हें इससे कोई मतलब नहीं था कि जयललिता जेल जाती हैं या नहीं। उन्हें बस इस बात की चिंता थी कि वह ऊंचे पर पर काबिज हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में हालात खतरनाक हो गए हैं। वह केंद्र सरकार से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अपील करेंगे।

उधर, कांग्रेस के नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि यह फैसला ऐसे राजनेताओं के लिए एक सबक है जो नैतिकता के रास्ते पर नहीं चलते। उधर, एनसीपी नेता माजिद मेनन ने कहा कि कानून के हाथ लंबे होते है। कोई इससे भाग नहीं सकता। भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए।

राज्य में संवैधानिक मशीनरी पूरी तरह से ध्वस्त: करुणानिधि

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द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि शनिवार को आरोप लगाया कि जयललिता को सजा सुनाए जाने के फैसले के बाद राज्य में संवैधानिक मशीनरी पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से दखल की अपील की है।

इस संदर्भ में उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और तमिलनाडु के राज्यपाल और मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है।

इसमें उन्होंने कहा कि राज्य में व्यापक पैमाने पर हिंसा हो रही है जिससे कानून व्यवस्था की दिक्कत उत्पन्न हो सकती है।

मोदी सरकार अन्नाद्रमुक से मधुर रिश्ते के पक्ष में

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तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को सजा होने के बावजूद मोदी सरकार अन्नाद्रमुक से मधुर रिश्ते बनाए रखने के पक्ष में है। पार्टी ने उनके खिलाफ आए कोर्ट के फैसले पर नकारात्मक संकेत देने से परहेज किया है।

दरअसल, अन्नाद्रमुक भले ही एनडीए का घटक दल नहीं है लेकिन जयललिता की पार्टी से सरकार ने सकारात्मक रिश्ता बनाए रखा है। उनकी पार्टी के वरिष्ठ सांसद थंबीदुरई को लोकसभा में डिप्टी स्पीकर बनाकर मोदी सरकार ने मधुर रिश्तों की नींव पहले ही रख दी है।

इस फैसले के बाद भाजपा खुलकर उनके पक्ष में नहीं आएगी। मगर संसद के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण बिलों को पारित कराने के लिए सरकार को उनकी मदद की जरूरत पड़ती रहेगी। खासकर राज्यसभा में पार्टी के 11 सांसद मोदी सरकार के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। उच्च सदन में भाजपा को 43 सांसदों के साथ बहुमत नहीं है। ऐसे में उसे महत्वपूर्ण बिलों के लिए अन्नाद्रमुक के साथ की सख्त जरूरत है।

जयललिता के लिए अनलकी रहा है सितंबर

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तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक प्रमुख जे जयललिता के लिए सितंबर का महीना अनलकी साबित होता रहा है। पहले 2001 में और अब 2014 में सितंबर माह में ही अदालत के फैसलों के चलते उन्हें मुख्यमंत्री का पद छोड़ना होगा।

21 सितंबर 2001 को अदालत की तरफ से भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था लेकिन मद्रास हाईकोर्ट द्वारा आरोपों को खारिज किए जाने के बाद फरवरी 2002 में उपचुनाव जीतकर वह दोबारा मुख्यमंत्री बनी थीं। इस बार भी 27 सितंबर को बंगलूरू स्थित विशेष अदालत ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी बताते हुए 4 साल की सजा सुनाई है।

हालांकि इस बार 66 वर्षीय जयललिता के लिए वापसी की राह काफी लंबी होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के फैसले के अनुसार, अब वह अगले 10 साल तक कोई चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगी।

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