खुलासा: मां के दूध तक पहुंचा लेड, शिशुओं के लिए जानलेवा
बढ़ते प्रदूषण से अब मां का दूध भी अछूता नहीं रहा। शिशुओं के लिए सर्वोत्तम आहार माने जाने वाले मां के दूध में लेड जैसे खतरनाक तत्व के मिलने की पुष्टि हुई है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक लेड सभी के सेहत के लिए नुकसानदायक है। मां के दूध से शिशुओं में इसकी अधिक मात्रा गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
बरेली कॉलेज की जन्तु विज्ञान विभाग की डॉ. सीमा कुदेशिया, वनस्पति विज्ञान विभाग के सेवानिवृत शिक्षक डॉ. डीके सक्सेना और पैथोलॉजिस्ट डॉ. शालीन दीक्षित ने शिशुओं को स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध का परीक्षण किया।
अध्ययन में बरेली की 30, बरेली के ही फरीदपुर और नवाबगंज की 20-20 और पीलीभीत, बदायूं की क्रमश: 30 व 20 माओं को शामिल किया गया।
लेड का खतरनाक प्रभाव
जुलाई 2014-15 तक किए गए इस परीक्षण में जिन माओं के दूध में लेड पाया गया, उनमें से ज्यादातर सड़कों के किनारे या चौबीस घंटे ट्रैफिक के बीच रहती हैं। इनमें से कुछ पेंट का काम भी करती हैं। डॉ. सीमा कुदेशिया ने बताया कि चूंकि पेट्रोल में लेड पाया जाता है इसी वजह से मां के दूध में लेड की मात्रा जांच की योजना बनी।
जो गर्भवती महिलाएं सड़क किनारे, जेनरेटर के धुएं के संपर्क में रहती हैं या पेंट का काम करती हैं, श्वसन के साथ लेड उनके शरीर में पहुंच गया। बाद में धीरे-धीरे उनके दूध तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि इन्वर्टर की बैटरियों से 70 फीसदी लेड पैदा होता है। बिजली की किल्लत वाले इलाकों के हर घरों में इन्वर्टर हैं, इससे खतरा और बढ़ जाता है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट की मानें तो खून में लेड की मात्रा 10 माइक्रो ग्राम प्रति डेसी लीटर से ज्यादा होने पर बच्चों में किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं यह सुनने की क्षमता प्रभावित होने के अलावा यह उनके शारीरिक विकास पर भी असर डालता है। ज्यादा लेड से बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह असामान्य व्यवहार, दांतों के क्षय आदि का कारक भी है।
शोध का तरीका
टीम ने अध्ययन के लिए सड़क के किनारे रहने वाली 120 माताओं का चयन किया गया। ये माएं शिशुओं को दूध पिला रही थीं। अध्ययन के दौरान एक साल तक इनकी निगरानी की गई और सहमति से उनके दूध के नमूने लिए गए।
कॉलेज की लैब में परीक्षण
अध्ययन दल ने बरेली कॉलेज की लैब में दूध के नमूनों का परीक्षण किया। दूध में लेड है यह तो स्पष्ट हो गया लेकिन इसकी मात्रा कितनी है, इसका खुलासा नहीं हो सका है। लेड की मात्रा की जांच अध्ययन के अगले चरण में की जाएगी।
‘लेड न्यूरो टॉक्सिक है जो सबके लिए नुकसानदेह है। इसकी मात्रा बढ़ने पर मां का नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। यही नहीं इससे बच्चों का विकास रुक जाता है।’ -डॉ. दीपक कुदेशिया, सर्जन