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जांच में ढिलाई पर यूपी पुलिस से जवाब तलब

Sat, 24 Nov 2012 08:55 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 24 Nov 2012 08:55 PM IST
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laxity in investigation explanation from up dgp

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने अलीगढ़ के जिला कारागार के निकट तीन साल पहले मिले कंकालों की जांच में ढिलाई पर उत्तर-प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से जवाब-तलब किया है।

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बरामद कंकाल परीक्षण के लिए हैदराबाद की केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) न भेजने पर आयोग ने यह कदम उठाया है। मई 2009 में यह कंकाल एक तालाब से बरामद हुए थे जो शव-विच्छेदन गृह के नजदीक स्थित है। आयोग ने इस मामले में दाखिल एक आरटीआई के जवाब में यह स्थिति स्पष्ट की है।
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इस मामले की जांच के लिए गौरव अग्रवाल, प्रवीण वार्ष्णेय और डीएस छोकर ने एनएचआरसी का दरवाजा खटखटाया था। आयोग के निर्देश पर राज्य पुलिस की सीबीसीआईडी ने जांच शुरू की। शिकायतकर्ताओं ने राज्य पुलिस की जांच पर असंतोष जताया और मामला सीबीआई के हवाले करने का आग्रह किया।
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उनका कहना था कि सीबीसीआईडी ने लंबी जांच के बाद भी कंकाल परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में नहीं भेजे हैं। इस हादसे के दोषी सरकारी अफसरों की पहचान भी नहीं की गई है। आयोग ने यह भी कहा कि अग्रवाल के अलावा बाकी दोनों शिकायतकर्ताओं ने अपने बयान जांच अधिकारी को नहीं सौंपे हैं।


याद रहे कि इस तालाब में पाए गए किसी भी कंकाल की पहचान नहीं हो सकी थी। इसके बावजूद इन कंकालों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला नहीं भेजा गया और तीन साल बीतने के बाद भी इस मामले की जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है।

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