अमेरिका: मतदान केंद्रों में तैनात होगी वकीलों की फौज

नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sat, 03 Nov 2012 08:04 AM IST
lawyers will keep eyes on american election
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कांटे की टक्कर है। मंगलवार 6 नवंबर को होने वाले मतदान में मौजूदा डेमोक्रेट राष्ट्रपति बराक ओबामा और रिपब्लिकन मिट रोमनी आमने सामने हैं। दोनों ही उम्मीदवारों के लिए एक-एक वोट कीमती हो सकता है। शायद यही सब देखते हुए दोनों ही उम्मीदवार कानूनी जंग के लिए भी तैयार हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छह नवंबर को वोटिंग के दौरान दोनों ही पक्षों के हजारों वकील मतदान केंद्रों में मौजूद रहेंगे और प्रतिद्वंद्वी पर नजर रखेंगे। वहां कुछ गड़बड़ी देखते ही तुरंत कानूनी कार्रवाई करेंगे।

यह वकील देखेंगे कि मतदान केंद्रों पर मतदानकर्मी किस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, कहां मतदाताओं को निर्देशित किया जा रहा है, कहां मतदाताओं पर दबाव डाला जा रहा है और कहां मतदाताओं की कतारें ज्यादा लंबी हैं। ये वकील शिकागो और बोस्टन में बनाए गए मुख्यालय को गड़बड़ी की जानकारी देंगे, जहां अदालती कार्रवाई संबंधी फैसला लिया जाएगा। दोनों ही तरफ से इस तरह की मोर्चाबंदी खास करके अति महत्वपूर्ण निर्णायक राज्यों में होगी। इस तरह के राज्यों में विस्कोंसिन, वर्जीनिया, फ्लोरिडा, पेंसलवानिया और ओहयो शामिल हैं।

एक ऑर्गनाइजर के अनुसार, ओहयो की कुयाहूगा काउंटी में ही डेमोक्रेट ने 600 वकीलों को मोर्चे पर लगाया है, पूरे ओहयो प्रांत में 2500 वकील तैनात रहेंगे। इन वकीलों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हालांकि ओहयो की कुयाहूगा काउंटी में रिपब्लिकन के मात्र 70 वकील ही मतदान केंद्रों में निगरानी रखेंगे। इससे साफ है कि संभावित मुकदमेबाजी के चलते चुनाव के नतीजे आने में देरी हो सकती है। कुयाहूगा काउंटी के बोर्ड ऑफ इलेक्शन के चेयरमैन रिपब्लिकन जेफ हास्टिंग्स का कहना है कि आप देखेंगे कि दोनों ही पक्ष शिकायतों को लेकर अदालत जाएंगे।
 
कुयाहूगा काउंटी के डेमोक्रेट पार्टी के चेयरमैन स्टुअर्ट गारसन को तोड़फोड़ की आशंका है, उनका कहना है कि अगर किसी को दूसरे का वोट डालते देखा गया तो कार्रवाई के लिए वहां हमारे वकील मौजूद रहेंगे। काउंटी के रिपब्लिकन पार्टी चेयरमैन रॉबर्ट एस फ्रास्ट का कहना है कि डेमोक्रेट पार्टी ने इतनी बड़ी लीगल टीम तैनात करके भ्रम पैदा करने की कोशिश की है।   
        
बुश जूनियर गए थे अदालत
वर्ष 2000 में हुए चुनाव में फ्लोरिडा में पड़ी वोटों के मामले में जॉर्ज डब्ल्यू बुश सुप्रीम कोर्ट गए थे। और वहां से चुनाव जीते थे। अल गोर ने जॉर्ज बुश से पांच लाख अधिक मत हासिल किए लेकिन वो इलेक्टोरल वोट्स की गिनती में पीछे रह गए। और कुछ जानकारों की मानें तो एक बार फिर ऐसा हो सकता है। उस समय यह सब मतदान के बाद हुआ था, लेकिन इस बार तो पहले से ही कानूनी जंग की तैयारी है।
   
पेंसलवेनिया में वोटर आईडी विवाद
अमेरिका के पेंसलवेनिया राज्य में मतदान में वोटर परिचय पत्र (आईडी) को लेकर दुविधा बरकरार है। यह मामला अदालत भी जा सकता है। इस राज्य में इसी साल एक कानून पास किया गया है जिसके अनुसार मतदान करने के लिए वोटर के पास आईडी होना जरूरी है। हालांकि एक अदालत यह व्यवस्था दे चुकी है कि जिन मतदाताओं के पास आईडी न हो उन्हें भी वोट डालने दिया जाए। यहां भी दोनों तरफ से वकीलों की टीमें मतदान केंद्रों में तैनात रहेंगी।

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