फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Lawyer lost to 'Tulsi Bahu'

जब वकील साहब से हार गई 'तुलसी बहू'

Sat, 22 Mar 2014 04:53 PM IST
Updated Sat, 22 Mar 2014 04:53 PM IST
विज्ञापन
Lawyer lost to 'Tulsi Bahu'

2004 में दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा सीट का दिलचस्प मुकाबला लोग भूले नहीं है। कांग्रेस के वकील साहब यानी कपिल सिब्बल के मुकाबले में भाजपा ने टीवी की चर्चित बहू तुलसी को उतारा था।

विज्ञापन


ये वो टाइम था जब हर घर में प्राइम टाइम 'तुलसी बहू' के नाम पर बुक था।

बहू तुलसी विरानी यानी स्मृति ईरानी को भाजपा ने बतौर तुरुप का इक्का इस्तेमाल किया लेकिन चांदनी चौक के चुनावी समीकरणों ने तस्वीर ही उलट दी।

बहू की झलक को उमड़ा हजूम

Lawyer lost to 'Tulsi Bahu'

चुनावों की तारीख घोषित होते ही छोटे परदे की आदर्श बहू चांदनी चौक के कटरों और मुहल्लों में जलूस निकालने लगी। तुलसी बहू को देखने के लिए भारी भरकम हजूम जुटने लगा। टीवी पर नजर आने वाली आदर्श बहू हकीकत में कैसी लगती है ये देखने के लिए सड़कों पर हजूम लगने लगा। ये वो समय था जब चांदनी चौक के घर घर में तुलसी की चर्चा हो रही थी।

यूं भी स्मृ‌ति दिल्ली की हैं। बढ़िया प्रवक्ता होने के साथ साथ आकर्षक व्यक्तित्व और हाजिरजवाबी के मामले में स्मृति सिब्बल से बीस ही थीं। यानी कुल मिलाकर भाजपा को पक्का भरोसा हो चुका था कि उसकी बहू लोकप्रियता और अपने चमकीले व्यक्तित्व के बलबूते सीट निकाल लेगी।

एक तरफ स्मृति ईरानी भीड़ जुटा रही थी तो दूसरी तरफ सिब्बल एक सयाने वकील की तरह चुपचाप चांदनी चौक की गलियों के चुनावी समीकरण नाप रहे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

स्मृति की हो सकती थी बल्ले बल्ले

Lawyer lost to 'Tulsi Bahu'

राजनीतिक हलकों में तो यहां तक चर्चा होने लगी थी कि भाजपा स्मृति ईरानी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाने की सोच रही है।

दरअसल पहले सुषमा को मुख्यमंत्री बनाने पर विचार हो रहा था। लेकिन चूंकि सुषमा राष्ट्रीय राजनीति की जरूरत बन चुकी थी इसलिए भाजपा को शीला को टक्कर देने के लिए स्मृति का नाम सामने आया।

लेकिन मतदाता के मन की कौन जानता है।

विज्ञापन

चाहा क्या, हुआ क्या

Lawyer lost to 'Tulsi Bahu'

चांदनी चौक के जातीय समीकरणों के बल पर वकील साहब ने स्मृति ईरानी को बड़ी मात दी, वो भी लगभग 80000 मतों के मार्जिन से।

80 हजार मतों का मार्जिन इसलिए ज्यादा है क्योंकि तब चांदनी चौक सीट से लगभग 3 लाख वोट ही पड़ते थे।

उस वक्त यह दिल्ली की सबसे छोटी लोकसभा सीट थी। इस सीट पर मात्र चार विधानसभा थी।

क्या कहता है इतिहास

Lawyer lost to 'Tulsi Bahu'

इस सीट का पुराना इतिहास बयान करता है कि यह सीट अधिकतर भाजपा के पास रही है। 1977 में सिकंदर बख्त के पास, 1988 में ताराचंद खंडेलवाल सांसद रहे। 1996 और 1998 में विजय गोयल 2 बार जीत चुके है।

सिकंदर बख्त और विजय गोयल चांदनी चौक के जातीय समीकरणों के बल पर सीट निकाल ले गए।

लेकिन स्मृति ईरानी के साथ ऐसा कुछ नहीं था। स्मृति को महिलाओं के वोट मिले लेकिन महिलाओँ का मतदान प्रतिशत दस फीसदी से भी कम था।

किसने पलट दिया पांसा

Lawyer lost to 'Tulsi Bahu'

सिब्बल की जीत में सबसे बड़ी भूमिका वहां के विधानसभा सदस्य शोएब इकबाल की रही।

दरअसल शोएब इकबाल के पास चांदनी चौक का मुसलिम वोट बैंक है। शोएब ने मुसलिम बहुल इलाकों में प्रचार कर सिब्बल को वोट देने की अपील की।

नतीजा ये रहा कि चांदनी चौक के मु‌सलिम बहुल क्षेत्रों जैसे बल्लीमारान, मटियामहल और पहाड़गंज से सिब्बल को भारी तादाद में वोट मिले।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed