केजरीवाल पर चले दिग्विजय के तीर
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम की राजनीतिक शैली पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि मुद्दे गलियों में नहीं बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाए जाते हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर उभार ने यह साबित कर दिया है।
दिग्विजय ने पत्रकारों से कहा कि सड़कों पर चिल्लाने के बजाय राजनीति में उतर कर पार्टी बनाना और विधानसभा या लोकसभा में घुसना ज्यादा अच्छा है। हर किसी को यह समझना होगा कि कानून संसद में बनते हैं ना कि रामलीला मैदान में।
मोदी और केजरीवाल में तानाशाही प्रवृति
दिग्विजय सिंह ने अपने इस बयान को सीधे अरविंद केजरीवाल से तो नहीं जोड़ा लेकिन यह जरूर कहा कि केजरीवाल और नरेंद्र मोदी, दोनों आत्ममुग्ध हैं और दोनों में मजबूत तानाशाही प्रवृति मौजूद है।
ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं कि दोनों को सिर्फ अपनी आवाज सुनना पसंद है। ये दूसरों की आवाज सुनना पसंद नहीं करते। यही वजह है कि नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटेकर समेत कई अन्य लोग केजरीवाल से दूर चले गए।
पीएम उम्मीदवार की घोषणा के खिलाफ
दिग्विजय से पूछा गया कि क्या कांग्रेस 17 जनवरी को राहुल गांधी के नाम को प्रधानमंत्री के पद के उम्मीदवार के तौर पर घोषित करेगी। इस पर उन्होंने कहा कि निजी तौर पर मैं चुनाव के पहले प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के खिलाफ हूं।
मंगलवार को कांग्रेस की एक बैठक में प्रियंका के शामिल होने के बारे में उन्होंने कहा कि वह 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी में मीडिया का काम देख रही हैं।