पति के वेतन में पत्नियों की हिस्सेदारी पर कानून जल्‍द

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 31 Oct 2012 11:10 PM IST
law on share of women in wage of husband soon
गृहणियों को घरेलू काम काज के बदले पति के वेतन में से हिस्सा देने का मामला उठाने वाले महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अब इस प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने की तैयारी शुरू कर दी है। मंत्रालय इस मसले पर 7 नवंबर को योजना आयोग समेत तमाम गैर सरकारी संस्थाओं, अर्थशास्रियों, महिला संगठनों व नारीवादी समूहों के साथ चर्चा करने जा रहा है।

अगले हफ्ते होने वाली पहली परामर्श बैठक की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ करेंगी। जबकि मंत्रालय के सचिव प्रेम नारायण समेत सभी आला अधिकारी भी इस बैठक में मौजूद होंगे। माना जा रहा है कि परामर्श बैठक के आधार पर महिलाओं को सशक्त करने और देश के विकास में घरेलू महिलाओं के योगदान का आकलन की रूपरेखा तैयार होगी।

जबकि इस महत्वपूर्ण मसले पर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमईडब्ल्यू) की भूमिका अहम होगी। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर जल्द लागू करना चाहता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कृष्णा तीरथ के मुताबिक यह प्रस्ताव महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

इस मसले पर कृष्णा तीरथ सितंबर में राज्यों के महिला एवं बाल विकास मंत्री और सचिवों से बात कर चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक अगले हफ्ते की बैठक के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश के सकल घरेलू विकास दर (जीडीपी) में गृहणियों के योगदान को जानने के लिए सांख्यिकी मंत्रालय से जल्द सर्वे कराने का अनुरोध भी करेगा। इस बाबत कृष्णा तीरथ सांख्यिकी मंत्रालय को पहले भी चिट्ठी लिख चुकी हैं।

क्या है प्रस्तावित कानून
महिला सशक्तिकरण के मद्देनजर तैयार किए गए इस प्रस्तावित कानून में प्रावधान है कि पति के वेतन का 10 से 20 फीसदी हिस्सा पत्नियों को दिया जाएगा ताकि वह आत्मनिर्भर बन सकें। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का मानना है कि घर को संभालने वाली करोड़ों भारतीय ग्रहणियों के श्रम को कम कर के नहीं आंका जाना चाहिए।

हो रहा है विरोध
पति के वेतन से पत्नी को निश्चित राशि देने संबंधी प्रस्तावित कानून के खिलाफ आवाजें भी बड़ी संख्या में उठ रही हैं। कई पुरुष संगठनों का मानना है कि यह कानून परिवार प्रथा के खिलाफ है। विभिन्न राज्यों में करीब 40 पुरुष संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘सेव फैमिली फाउंडेशन’ ने इस संबंध में कृष्णा तीरथ को पत्र लिखने के अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी हस्तक्षेप की मांग की है। फाउंडेशन के मुताबिक इससे परिवार में विरोध पैदा हो सकते हैं। दूसरी ओर महिला अधिकारों के लिए काम कर रहे संगठनों का भी मानना है कि निश्चित वेतन की बजाय पत्नी को संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलना चाहिए।

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