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कानून लागू होने के सात साल बाद सुधरा राजभाषा राजपत्र

Mon, 12 Nov 2012 08:00 AM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Mon, 12 Nov 2012 08:00 AM IST
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law improved official gazette after seven years

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम-2005 के लिए भारत का राजपत्र जारी हुए सात साल बीत गए हैं। अब जाकर हिंदी को बढ़ावा देने का दावा करने वाली केंद्र सरकार अपनी एक वेबसाइट में राजभाषा में जारी राजपत्र की गलतियों को सुधार पाई है। साढ़े तीन साल पहले सजग नागरिकों की गुहार पर इस संबंध में एक आदेश जारी कर खानापूर्ति की गई थी, लेकिन सुधार अब जाकर हुआ है।

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आरटीआई कार्यकर्ता कोमोडोर लोकेश बत्रा ने गलतियों को सुधारने के संबंध में प्रधानमंत्री को अप्रैल 2008 में एक ई-मेल भेजा था। उसका जवाब न मिलने पर उन्होंने मई 2008 में प्रधानमंत्री कार्यालय को एक आरटीआई भेजी।
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आरटीआई के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय ने बत्रा को पत्र भेजा, जिसमें बताया गया कि गलतियों को सुधारने के संबंध में डीओपीटी (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) को निर्देश जारी कर दिया गया है। हालांकि डीओपीटी ने ऐसा कोई निर्देश मिलने से इनकार कर दिया। डीओपीटी के इनकार से निराश बत्रा ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का दरवाजा खटखटाया था।
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सीआईसी के आदेश पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने डीओपीटी को भेजा गया पत्र उपलब्ध कराया। पत्र उपलब्ध होने के बाद बत्रा ने जून, 09 में डीओपीटी को फिर एक आरटीआई आवेदन भेजा। इसके बाद डीओपीटी ने कानून मंत्रालय के आधिकारिक भाषा विंग से संपर्क साधा। मंत्रालय ने 22 जून, 09 को 34 गलतियों के संबंध में शुद्धिपत्र जारी कर अवर सचिव डीओपीटी को निर्देश जारी किया, लेकिन इस निर्देश के साढ़े तीन साल बाद वेबसाइट rti.gov.in में उपलब्ध हिंदी राजपत्र की गलतियों में सुधार किया गया।


गौरतलब है कि वेबसाइट में राजपत्र में कई साल तक कायम रही त्रुटि कुछ इस तरह थी। उदाहरण के तौर पर उसमें लिखा था कि कोई ऐसा निकाय जो केंद्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन निधियों द्वारा वित्तपोषित है। जहां केंद्रीय सरकार लिखा था, वहां उचित सरकार किया गया है, क्योंकि देश में सिर्फ केंद्र ही नहीं राज्य सरकारें भी हैं। ऐसी ही 34 गलतियों का सुधार करने में सरकार को लंबा समय लग गया। वह भी तब संभव हुआ जबकि कानून मंत्रालय ने इस पर निर्देश दिया और सजग नागरिकों की ओर से कई शिकायतें की गईं।

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