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बलात्कार रोकने के लिए सऊदी जैसा बना देंगे?

Tue, 17 Mar 2015 03:26 PM IST
ताबिश खैर/लेखक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
ताबिश खैर/लेखक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम Updated Tue, 17 Mar 2015 03:26 PM IST
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law for rape and sexuality in india after the delhi rape.

ऐसा लगता है कि बलात्कार से ‘लड़ने’ के मुद्दे पर भारत दो खेमों में बंटा हुआ है। कुछ लोग पुरुषों की मानसिकता बदलने की बात करते हैं तो कुछ महिलाओं पर अंकुश लगाने की।

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पहले खेमे का सुझाव है कि बलात्कार करने वाले पुरुषों के आपराधिक प्रवृत्तियों पर लगाम लगाई जानी चाहिए। दूसरा खेमा महिलाओं पर अंकुश लगाने का सुझाव देता है, इसमें बहुत से पुरुष शामिल हैं।
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पहले खेमे के पास बहुत सारे सुझाव हैं, जैसे- कड़े कानून, फास्ट ट्रैक अदालतें, बेहतर शिक्षा, पर्याप्त पुलिस व्यवस्था आदि। इनमें कई सुझाव एक दूसरे से जुड़े हैं तो कई विरोधाभासी।
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लेकिन दूसरे खेमे के पास केवल एक सुझाव है- महिलाओं पर अंकुश और किसी भी प्रकार की कामुकता पर पाबंदी। यह सुझाव कई तरीकों से रखा जाता है।

बलात्कार और महिला उत्पीड़न का विरोध करने वालों समेत बड़ी संख्या में भारतीय दूसरे खेमे की सोच को मानते हैं। यह यह दरअसल महिलाओं, उनके पहनावे, उनके बाहर निकलने जैसी कई बातों पर अंकुश लगाने का सुझाव देता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि एक संस्कृति या मुख्यधारा की संस्कृति के तौर पर हम सेक्सुअलिटी के बारें में बातें करने से संकोच करते हैं।

हम इसके बारे में खुले या सामान्य तरीक़े से बात नहीं करते हैं। इसके बावजूद या शायद इसी कारण हमारी बातचीत में अश्लील मजाक और द्विअर्थी बातें अक्सर आती रहती हैं और फिल्मी गीत इस तरह की भाव भंगिमाओं से भरे होते हैं।

क्या हो बलात्कार रोकने का तरीका?

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ऐसा लगता है कि कुछ ही लोग इस ओर इशारा कर पाते हैं कि बलात्कार रोकने का तरीका यह नहीं है कि महिला सेक्सुअलिटी समेत हर तरह की सेक्सुअलिटी की ओर से आंखें फेर ली जाएं। बल्कि इसका सामना करने का तरीका है कि इसे एक तथ्य के रूप में स्वीकार कर लिय जाए।

भाव यह है कि यह मानना गलत है कि महिलाओं के आने जाने और पहनावे पर पाबंदियों से बलात्कार रुक जाएगा। इससे ऐसा लगेगा कि बलात्कार तभी रुकेगा जब इस तरह की पाबंदियों को सउदी अरब में लगी पाबंदियों जैसा कठोर बना दिया जाए।

मैंने ‘लगेगा’ कहा, क्योंकि पाबंदियों के इस स्तर पर एक महिला इतने अधिकार खो देती है कि बलात्कार कोई मुद्दा नहीं रह जाता।

उदाहरण के तौर पर सउदी अरब में सामूहिक बलात्कार की शिकार एक महिला को इसलिए दंडित किया गया कि उसने इसके बारे में ‘खुलकर’ बोल दिया।

इस तरह के मामलों में महिला के पास बलात्कार का मामला दर्ज कराने का बहुत कम या बिल्कुल भी मौका नहीं होता है।

एक से अधिक पत्नी रखने जैसे अधिकार

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इसके अलावा, पुरुषों को एकतरफा तलाक और एक से अधिक पत्नी रखने जैसे अधिकार दिए जाते हैं। इससे बलात्कार जैसी यौन हिंसा और सत्ता नियंत्रित करने का यह बर्बर तरीका भी जरूरी नहीं रह जाता।

इस तरह के समाजों में पुरुषों को शायद इसकी जरूरत नहीं रह जाती कि वे महिलाओं पर नियंत्रण और दबदबा बनाए रखने, उनके शोषण करने और उन्हें अधीन बनाने के लिए उनका बलात्कार करें।

महिलाओं पर प्रतिबंध लगाकर भारत में बलात्कार से निपटने की कोई भी बहस की दिशा, समाज को अनिवार्य रूप से इसी ओर ले जाएगी। यह तथ्य कि सउदी अरब जैसी जगहों के मुक़ाबले, जर्मनी जैसे ‘खुले’ देशों में बलात्कार के मामले अधिक दर्ज होते हैं, भ्रम पैदा करने वाला है।

वहां बलात्कार के अधिक मामले दर्ज होते हैं क्योंकि ज्यादातर महिलाएं साहसी होती हैं। इसके अलावा उन्हें मुक़दमा दर्ज कराने और बलात्कार का विरोध करने के लिए सामाजिक समर्थन भी हासिल होता है।

ऐसा इसलिए भी है क्योंकि अत्याचारी पुरुष कानून की आड़ में नहीं छिप सकते।

बलात्कार और पाबंदियां

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बलात्कार को कम करने का तरीका यह नहीं है कि महिलाओं पर पाबंदियां लगाई जाएं, बल्कि उन्हें आने जाने और पहने ओढ़ने की पूरी आज़ादी दी जाए। यह सही है और ऐसा लग सकता है कि यह एक खास किस्म के पुरुषों की ओर से हमले को बढ़ाए, लेकिन ऐसे ही लोगों को नियंत्रित करना और रोकना है, न कि महिलाओं को।

स्वाभाविक रूप से, यदि एक महिला का पहनावा या उसका व्यवहार एक खास सांस्कृतिक परिवेश में ‘अप्रिय’ लगे तो यह उसका बलात्कार करने का कोई कारण न है और न हो सकता है।

इससे भी ज्यादा, यह उसके बलात्कार का स्पष्टीकरण देने का कारण भी नहीं हो सकता। यहां तक कि ‘उसे सुरक्षित’ रखने के लिए, अलग तरह से व्यवहार करने या पहनने ओढ़ने को मजबूर करने का तर्क भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

जब तक जाहिरा तौर पर कोई अपराध न किया जा रहा हो, पुरुषों की तरह ही महिलाओं का शरीर, उसी पर छोड़ देना चाहिए। पश्चिमी पहनावा या किसी पुरुष के साथ बाहर निकलना कोई अपराध नहीं है और इस तरह के मामले में फैसला उस महिला पर ही छोड़ देना चाहिए।

एक बार हम अन्य लोगों के शरीर को नियंत्रित करना शुरू कर देते हैं तो हम उसी तरह की मानसिकता को सही ठहराने लगते हैं जो बलात्कार की ओर ले जाता है। आखिरकार, बलात्कार किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर को अधीन करने और उसे नियंत्रित करने का सबसे बर्बर तरीका है।

जो पुरुष, महिलाओं को नियंत्रित करने और उन्हें एक खास तरीके से व्यवहार करने के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, वो ऐसे पुरुष बनने से थोड़ी ही दूर हैं, जो महिलाओं का बलात्कार करने के लिए शारीरिक ताकत का इस्तेमाल करते हैं।

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