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देश में फांसी की सजा पर रोक लगाने की सिफारिश

Mon, 31 Aug 2015 09:43 PM IST
Updated Mon, 31 Aug 2015 09:43 PM IST
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Law Commission Recommend prohibiting capital punishment

फांसी की सजा को लेकर देशभर में शुरू हुई बहस के बीच विधि आयोग ने आतंकवाद और देशद्रोह को छोड़कर अन्य मामलों में फांसी की सजा को खत्म करने की सिफारिश की है।

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आयोग का मानना है कि फांसी की सजा होने के बावजूद अपराधों पर रोक नहीं लगी और न ही अपराधियों में इसका खौफ है। इससे ज्यादा असर तो उम्रकैद की सजा का पड़ा है।
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नौ सदस्यीय आयोग के सभी सदस्य इस सिफारिश से सहमत नहीं हैं। तीन सदस्य फांसी की सजा के पक्ष में हैं। इनमें से एक फुलटाइम सदस्य जबकि दो सरकारी सदस्य हैं।

20वें विधि आयोग ने सोमवार को अपनी 272 पेज की रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि फांसी की सजा को खत्म करने को लेकर बहस की जरूरत आ पड़ी है।

आयोग ने कहा कि मृत्युदंड को खत्म करने के कई विकल्प हैं। इस पर या तो बिना किसी विलंब के रोक लगाई जा सकती है या इसे खत्म करने के लिए अलग से बिल लाया जा सकता है।
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आयोग ने कहा कि फांसी को खत्म करने के लिए किसी खास तरीके को अमल में लाने की सिफारिश करने का उसका कोई इरादा नहीं हैं। आयोग ने आतंकवाद और देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा का समर्थन किया है।

आयोग का मानना है कि आतंकवाद को अन्य अपराधों से अलग मानने का कोई वैध कारण तो नहीं है लेकिन समय-समय पर यह तर्क दिया जाता है कि आतंकवाद और देशद्रोह के मामलों में मृत्युदंड खत्म करने से राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

रेयररेस्ट ऑफ रेयर सिद्धांत पर सवालों के घेरे में

Law Commission Recommend prohibiting capital punishment

जस्टिस एपी शाह की अध्यक्षता वाले आयोग ने रेयररेस्ट ऑफ रेयर के सिद्धांत पर भी सवाल उठाया है, जिसके आधार पर फांसी की सजा दी जाती है।

आयोग का कहना है कि लंबी और विस्तृत चर्चा के बाद उसका मानना है कि रेयररेस्ट ऑफ रेयर के सिद्धांत के तहत फांसी की सजा भी संवैधानिक तौर पर नहीं टिकती।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फांसी की सजा जारी रखने से कई गंभीर संवैधानिक सवाल उठते हैं। मसलन न्याय का निष्फल होना, आपराधिक न्याय व्यवस्था में गरीबों की दुर्दशा आदि।

आयोग के छह सदस्य आतंकवाद और देशद्रोह के मामलों को छोड़ अन्य मामलों में फांसी की सजा खत्म करने के पक्षधर हैं वहीं फुल टाइम मेंबर सेवानिवृत्त जस्टिस उषा मेहरा के अलावा विधि सचिव पीके मल्होत्रा और सचिव संजय सिंह मृत्युदंड के पक्ष में हैं।

फांसी पर रोक को विधि आयोग की अहम बातें

Law Commission Recommend prohibiting capital punishment

- सिफारिश में कहा गया है कि फांसी पर रोक लगाने की प्रक्रिया काफी आसान और स्थिर होगी
- आंख के बदले आंख के सिद्धांत को संविधान की बुनियादी भावना के खिलाफ बताया गया
- आयोग ने तर्क दिया कि बदले की भावना से न्यायिक तंत्र नहीं चल सकता
- रिपोर्ट भारत में मौत की सजा होनी चाहिए या नहीं पर केंद्रित है
- आगे पैनल के प्रावधानों में किसी भी बदलाव की मांग पर संसद ही विचार करेगी
- मुंबई सीरियल बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन को फांसी दिए जाने के बाद शुरू हुई थी सजा को लेकर बहस
- सुप्रीम कोर्ट ने संतोष कुमार सतीश भूषण बारियार खिलाफ महाराष्ट्र और शंकर किसनराव खाड़े विरुद्ध महाराष्ट्र मामले में अध्ययन की बात कही थी

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