दोपहर बाद धधकी बनारस में ‘आधी रात’ की चिंगारी
गतिविधियों पर लगातार निगरानी के बावजूद विसर्जन विवाद के मसले पर शहर के माहौल और आम जनता के मिजाज को प्रशासन नहीं भांप पाया। लाठीचार्ज को लेकर आम जनमानस में भरे गुस्से का अंदाजा सुरक्षा एजेंसियां भी नहीं लगा सकीं। दोपहर बाद साधु-संतों के आंदोलन में उमड़े जनसैलाब से प्रशासन के रणनीतिकार चौंक गए।
लेकिन, पुलिस-प्रशासन को संभलने तक का मौका नहीं मिला और हालात पलक झपकते बेकाबू हो गए। 22 सितंबर की आधी रात जिस गोदौलिया चौराहे पर लोगों ने पुलिस की लाठियां खाई थीं, आज दोपहर बाद वहीं पुलिस को पीटा।
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में आया है कि पुलिस से दो-दो हाथ करने की तैयारियां पहले ही कर ली गई थीं। पुलिस के खिलाफ लोग इतने आक्रामक हो जाएंगे इसका अंदाजा नहीं था। यात्रा के गोदौलिया के करीब पहुंचते ही भीड़ अचानक से पुलिस पर टूट पड़ी। जो पुलिसकर्मी जहां मिला उसे वहीं जमकर पीटा।
चौराहों के पास रहने वाले लोग भी घरों से बाहर निकल आए। बाहर तैनात पुलिस कर्मियों की पिटाई की जाने लगी। लोग इतने गुस्से में थे कि वह किसी की जान भी ले सकते थे। आम जनता के गुस्से से पुलिस-प्रशासन के उच्चाधिकारी इतने हैरान थे कि कुछ करने की स्थिति नहीं बन पा रही थी।
सबक सिखाने का एलान भी खुलेआम हुआ
अन्याय प्रतिकार यात्रा शुरू होने के पूर्व संत समाज के लोग टाउनहाल में जुटे थे। संतों ने भाषण के जरिए लोगों को भड़काने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पुलिस और प्रशासन को सबक सिखाने का एलान भी खुलेआम हुआ। यहीं से बवाल की जमीन तैयार हो गई थी।
टाउनहाल मैदान में ही संत समाज और समर्थक 22 सितंबर को लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों को चिह्नित करने में भी लगे थे। यात्रा के कन्हैया चित्र मंदिर पहुंचते-पहुंचते आगे चल रहे लोगों ने अफवाह फै ला दी कि पुलिसवाले लोगों को दौड़ाकर पीट रहे हैं।
इसके बाद भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। करीब बीस से ज्यादा पुलिसकर्मियों को घेरकर पीटा गया। फोर्स पहुंचने के बाद भी लोग पीछे हटने को तैयार नहीं थे। डीएम राजमणि यादव और एसएसपी आकाश कुलहरि माइक लेकर लोगों को समझाते रहे लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं थे।