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Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   LAST DAYS OF SUBHAS BOSE: 17 AUG 1945: BANGKOK-SAIGON-TOURANE

खुलासा: नेताजी सुभाष चंद्र बोस का विमान था ओवर लोडेड

Mon, 04 Jan 2016 03:57 PM IST
Updated Mon, 04 Jan 2016 03:57 PM IST
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LAST DAYS OF SUBHAS BOSE: 17 AUG 1945: BANGKOK-SAIGON-TOURANE

एक ब्रिटिश वेबसाइट ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की अंतिम दिनों से जुड़ी कुछ फाइलें साझा की हैं। इन फाइलों नेताजी के अंतिम हवाई यात्रा से ठीक पहले की उथल-पुथल से संबंधित जानकारियां हैं। गौरतलब है कि 18 अगस्त 1945 में वह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें नेताजी यात्रा कर रहे थे।

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जिस वेबसाइट ने नेताजी की मौत से ठीक पहले की उथल पुथल के बारे में जानकारी साझा की है उसे नेताजी के परपोते और स्वतंत्र पत्रकार आशिष रे संचालित करते हैं। इस वेबसाइट का नाम बोसफाइल्स है जहां नेताजी से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की गई हैं। दस्तावेज के मुताबिक 17 अगस्त 1945 को सुभाष चंद्र बोस बैंकाक से रवाना हुए थे और दोपहर से पहले साइगान (जिसे अब हो ची मिन्ह शहर के नाम से जाना जाता है) पहुंच गए थे।
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इस बात का खुलासा 1956 के उस दस्तावेज से होता है जिसमें मेजर जनरल शाह नवाज की अगुवाई में कई भारतीयों और जापानियों के बयान दर्ज है। उनमें से प्रोविजनल गवर्मेंट ऑफ फ्री इंडिया (पीजीएफआई) के एसए अय्यर और देबनाथ दास, इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के कर्नल हबीब-उर-रहमान शामिल थे। ये नेताजी के अगुवाई में काम करते थे।
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ओवर लोडेड था विमान

LAST DAYS OF SUBHAS BOSE: 17 AUG 1945: BANGKOK-SAIGON-TOURANE

एनआईए के चीफ ऑफ स्टॉफ मेजर जनरल भोंसले ने भी ब्रिटिश मिलिटरी इंटेलिजेंस की पूछताछ के दौरान भी यही बयान दिया था कि नेताजी 17 अस्गत 1945 को बैंकॉक से साइगान के लिए रवाना हुए थे। नेताजी के साइगान यात्रा से कुछ दिन पहले ही जापान ने द्वितीय विश्व में मिली हार को स्वीकार किया था। हार के बाद जापान भ्रम की स्थिति में था कि आखिर वह आगे क्या कदम उठाए। वह नेताजी को पूर्वोत्तर एशिया तक लाना चाहता था।

इसी बीच जापानी प्राधिकारियों, पीजीएफआई और आईएनए के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले हिकारी किकन के जनरल इसोदा ने बोस को अवगत कराया की टोक्यो जाने वाली विमान में दो सीटें खाली हैं। इसका मतलब यह था कि उनके अधिकतर सलाहकार और अधिकारी उनके साथ नहीं जा सकते थे।

एनआई के कर्नल प्रीतम सिंह ने जांच समिति को जो दस्तावेज सौंपे थे उसके मुताबिक नेताजी को यह प्रस्ताव स्वीकरा करने की सलाह दी गई थी। उनके सहयोगी के रूप में कर्नल रहमान उनके साथ गए थे। विमान उड़ान भरता इससे पहले उसमें ओवरलोडिंग की समस्या आ गई। जिसके बाद बोस ने अपने कुछ सामान वहीं छोड़ दिए जिसमें कुछ किताबें और उनके कपड़े थे।

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