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भारत में हमलों के लिए लश्कर का नया प्लान

Mon, 14 Jul 2014 06:08 PM IST
एजेंसी/श्रीनगर, नई दिल्ली
एजेंसी/श्रीनगर, नई दिल्ली Updated Mon, 14 Jul 2014 06:08 PM IST
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lashkar plan for terrorist attacks in india

भारत के खिलाफ कई आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले पाकिस्तान स्थित आतंकवादी गुट लश्कर ए ताइबा ने अब नई रणनीति अपनाई है। बेकसूरों और मासूमों की निर्दयता से जान लेने वाले अपने लड़ाकों को बचाने के लिए वह भारतीय कानूनों की मदद ले रहा है। लश्कर ने जम्मू और कश्मीर में मौजूद अपने लड़ाकों से कहा है कि यदि वे भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा पकड़े जाएं तो अपनी उम्र 18 साल से कम बताएं, जिससे उन्हें कम से कम सजा भुगतनी पड़े।

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लश्कर ए ताइबा की इस नई रणनीति का खुलासा गिरफ्तार किए गए आतंकी मोहम्मद नवेद जट उर्फ अबू हनाजला ने किया। जट पूछताछ में लगातार अपनी उम्र 17 साल ही बताता रहा लेकिन जांच में उसकी उम्र 22 साल निकली। पाकिस्तान के मुल्तान निवासी जट को पुलिस ने दक्षिण कश्मीर में पिछले महीने के तीसरे हफ्ते में गिरफ्तार किया था। उसने बताया कि वह अक्तूबर 2012 में 6 लड़कों के साथ उत्तर कश्मीर के केरन सेक्टर से कश्मीर पहुंचा था।
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सेना के रिटायर्ड ड्राइवर के बेटे जट को लश्कर के मुखौटा संगठन जमात उद दावा के कई मदरसों में ट्रेनिंग दी गई थी। जट पर दक्षिण कश्मीर में कई पुलिसकर्मियों की हत्या, सेना, पुलिस बल पर हमला, नैशनल कांफ्रेंस के विधान परिषद सदस्य की हत्या के प्रयास का आरोप है।
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क्या है इस रणनीति की वजह

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पूछताछ में जट ने बताया कि सीमापार बैठे लश्कर आकाओं ने उसे अपनी उम्र 17 साल ही बताने को कहा था। उसने बताया कि लश्कर ने अपने नए आतंकियों से कहा था कि उन्हें 18 साल से कम उम्र के लड़कों की तरह व्यवहार करना है ताकि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत नहीं बल्कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो। भारत में किशोर न्याय अधिनियम के तहत अधिकतम सजा तीन साल है।

विदेशी भाषाएं भी सिखाई जाती हैं आतंकियों को

पाक आतंकी जट ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान लश्कर के शीर्ष आका लड़कों की योग्यता को देखते थे और उसी के अनुसार उन्हें क्षेत्र में भेजा करते थे। इन प्रशिक्षु आतंकियों को चेचेन, सीरियाई और इराकी भाषाएं भी सिखाई जाती हैं। 

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