फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Lashkar-e-Toiba and Lashkar-e-Islam war

लश्कर-ए-ताइबा और लश्कर-ए-इस्लाम के बीच जंग

Wed, 16 Sep 2015 07:35 AM IST
Updated Wed, 16 Sep 2015 07:35 AM IST
विज्ञापन
Lashkar-e-Toiba and Lashkar-e-Islam war

कश्मीर घाटी में आतंकी संगठनों के बीच वर्चस्व की जंग तेज हो गई है। बारामूला के पट्टन इलाके में तीन युवकों की हत्या इसी जंग का नतीजा है।

विज्ञापन


पाकिस्तान पोषित लश्कर-ए-ताइबा ने घाटी के युवा आतंकियों के संगठन लश्कर-ए-इस्लाम को खत्म करने के लिए मुहिम छेड़ रखी है।

जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि लश्कर-ए-ताइबा सोपोर इलाके में बेस बनाने की कोशिश में जुटा है। इस बीच हिजबुल मुजाहिदीन ने मारे गए आतंकियों को हिज्ब का हिस्सा बताया है।
विज्ञापन


सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक हिजबुल मुजाहिदीन से बगावत कर आतंकी कयूम नजर ने लश्कर-ए-इस्लाम के नाम से गतिविधियां शुरू की हैं।

इसमें कश्मीर घाटी के 17 से 24 साल के किशोर और युवा शामिल हैं। पिछले दिनों मोबाइल टावरों और टेलीफोन प्रतिष्ठानों पर हुए हमले में इसी संगठन का हाथ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस पर हिज्ब नाराजी भी जता चुका है। लश्कर-ए-इस्लाम के खिलाफ जारी मुहिम में लश्कर-ए-ताइबा और हिजबुल मुजाहिदीन ने हाथ मिला लिए हैं।

इस्लाम के तीन आतंकियों की हत्या

Lashkar-e-Toiba and Lashkar-e-Islam war

राफियाबाद में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी जावेद अहमद ने भी बताया है कि उसे सोपोर में लश्कर-ए-ताइबा के आधार पर कैंप बनाने का टास्क दिया गया था।

पट्टन इलाके में तीन कश्मीरी आतंकियों की हत्या के बाद आशंका बढ़ी है कि लश्कर-ए-ताइबा अपनी कोशिश में कुछ हद तक कामयाब हो चुका है।

इनके शवों पर गोलियों के निशान के अलावा क्रूरता के अन्य चिह्न भी थे। हत्या से पहले इनके नाखून भी उखाड़े गए थे। एजेंसियों के मुताबिक ये लोग लश्कर-ए-इस्लाम के लिए काम कर रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि लश्कर-ए-ताइबा ऐसे और हमले कर सकता है।

पाकिस्तानी आतंकी जावेद अहमद के साथ पांच आतंकी उड़ी सेक्टर के दाहिने छोर पर स्थित काला पहाड़ इलाके से वाया छम्ब घुसपैठ कर आए थे। उस दल के अलावा लश्कर-ए-ताइबा के सौ से अधिक आतंकी घाटी में सक्रिय रहे हैं।

क्या है लश्कर-ए-ताइबा

Lashkar-e-Toiba and Lashkar-e-Islam war

लश्कर-ए-ताइबा को आंतकी हाफिज सईद ने अफगानिस्तान में अब्दुल अज्जाम और जफर इकबाल के साथ मिल कर खड़ा किया था। इसका मुख्यालय पाकिस्तान में लाहौर के पास है।

यह भारत के अलावा अमेरिका की ओर से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सूची में भी शुमार है। इसका चैरिटेबल विंग जमात उद दावा पीओके में सक्रिय है।

लश्कर-ए-इस्लाम की जड़ भी पाक में
लश्कर-ए-इस्लाम पाकिस्तान में 2004 में वजूद में आया। बाद में इस संगठन के कई प्रमुख आतंकियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। तीन माह पहले इसे जम्मू कश्मीर में नई जिंदगी मिली जब हिजबुल मुजाहिदीन से अलग होकर आतंकी कयूम नजर ने इसे फिर से खड़ा किया।

कयूम नजर अपने तरीके से काम करता है और लश्कर-ए-ताइबा को मंजूर नहीं है। नजर ने फिर से जिंदा किए संगठन में सौ से अधिक कश्मीरी युवकों को शामिल किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed