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लश्कर के निशाने पर अमरनाथ यात्री

Fri, 27 Jun 2014 08:55 AM IST
Updated Fri, 27 Jun 2014 08:55 AM IST
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Lashkar-e-Taiba targets amarnath Yatri

भारत में बड़ी वारदात करने को आतुर पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा ने इस बार की अमरनाथ यात्रा को अपना निशाना बना रखा है।

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खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक लश्कर 1996 में तमाम कश्मीरी आतंकी और अलगाववादी संगठनों की ओर से श्रद्धालुओं पर हमले नहीं करने के वादे को तोड़ने पर आमादा है।

सरकार के आंतरिक सुरक्षा विभाग को सूचना मिली है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आरएसएस की बढ़ती सक्रियता और स्वीकार्यता पाकिस्तान के भारत विरोधी तबके को खटक रही है।

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अमरनाथ या‌त्रा करने वालों पर निशाना

Lashkar-e-Taiba targets amarnath Yatri

यही वजह है कि भारत में बड़े हमले करने का दबाव झेल रहा लश्कर अमरनाथ यात्रा को माकूल मौके की तरह देख रहा है। सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक इस बार का खतरा वास्तविक है।

खुफिया तंत्र के शीर्ष अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि मोदी के शपथ ग्रहण के दो दिन पहले अफगानिस्तान के हेरात स्थित भारतीय दूतावास पर लश्कर का हमला इसी की बानगी थी।

दरअसल योजना थी कि दूतावास के लोगों को बंधक बना मोदी सरकार को चुनौती दी जाए। लेकिन उस वक्त मिली सटीक खुफिया जानकारी ने लश्कर की इस बड़ी योजना को कामयाब नहीं होने दिया।

यही वजह है कि अमरनाथ यात्रा से संबंधित खुफिया सूचना को हर साल की तरह सामान्य तौर पर नहीं देखा जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय और खुफिया विभाग के अधिकारी घाटी में मौजूद हैं।

1996 में आतंकी संगठनों ने किया था वादा

Lashkar-e-Taiba targets amarnath Yatri

1991 से 1995 तक पाक समर्थित कश्मीरी संगठनों के हमले की आशंका के चलते यह यात्रा बंद थी। 1996 में बैक चैनल बातचीत में इन संगठनों ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से अलिखित वादा किया था कि अमरनाथ श्रद्धालुओं की यात्रा पर कोई भी संगठन हमला नहीं करेगा।

मगर लश्कर ने करीब चार साल बाद इस वादे की परवाह किए बिना वर्ष 2000 में अमरनाथ यात्रियों पर हमला कर तीस लोगों को मार डाला था। अब चौदह साल की शांति के बाद खुफिया और सुरक्षा एजेंसी इस बार खास तौर पर सतर्क हैं।

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