देश की सबसे बड़ी पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों को नहीं मिलेगी शराब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश की सबसे बड़ी पैरामिलिट्री फोर्स सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) ने अपने जवानों और अधिकारियों के लिए शराब की नियमित खरीदारी पर प्रतिबंध लगा दिया है।
ऐसा पाया गया है कि शराब के सेवन से जवानों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। तीन लाख मजबूत पुलिस बल वाले सीआरपीएफ ने व्हिस्की, रम, जिन और वोदका जैसी शराबों की खरीदारी की प्रक्रिया केंद्रीकृत कर दी है। अब इस बारे में निर्णय राष्ट्रीय राजधानी में स्थित हेडक्वार्टर ही लेगा जो पहले स्थानीय यूनिट के स्तर पर लिया जाता था।
हाल ही में इस संदर्भ में एक आदेश जारी किया गया है जिसमें कहा गया है, ‘अब से सीआरपीएफ का कोई भी संस्थान रोजमर्रा की योजना के तहत शराब की खरीदारी नहीं करेगा’ और ‘कोई यूनिट जो ऐसी शराब की खरीदारी करना चाहती है तो उसे कम से कम महानिदेशक के कार्यालय से प्रत्येक मामले के आधार पर इसकी अनुमति लेनी होगी।’
सूत्रों ने बताया कि यह निर्णय सीआरपीएफ के प्रमुख प्रकाश मिश्रा की अध्यक्षता में कुछ समय पहले हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया है।
शराब की वजह से मौत और आत्महत्या
उच्च स्तरीय बैठक में ऐसी शराब पीने से हुई मौतों और होने वाली विभिन्न बीमारियों पर भी चर्चा की गई जिनकी बिक्री कैंटीन के जरिये कम कीमत पर की जाती है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभिन्न यूनिटों में पिछले वर्ष 40 सीआरपीएफ कर्मियों की मौत हुई थी जिसका कुछ न कुछ संबंध शराब पीने से था।
अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष 23 सीआरपीएफ जवानों की आत्महत्या की घटना सामने आई है जिसके कई कारण हैं और शराब भी इसकी एक वजह नजर आती है। इसलिए, यूनिट और रेंज के स्तर पर शराब की खरीदारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया गया है।
सीपीसी में शराब को शामिल करने का इंतजार
सूत्रों ने बताया कि सेंट्रल पुलिस कैंटीन (सीपीसी) में शराब को आवश्यक आइटम के तौर पर शामिल करने के प्रस्ताव को गृह मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है।
एक अधिकारी ने बताया कि सीपीसी के जरिए सामानों के वितरण की प्रणाली पूर्णत: नियंत्रित है। अगर इसकी अनुमति मिल जाती है तो जवान सीपीसी से सीधे अपने कोटे के हिसाब से शराब की खरीदारी कर सकते हैँ।